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पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) चीन के आक्रामक रवैये के जवाब में भारत चौतरफा रणनीति बनाने में जुटा है। एक तरफ चीन के साथ बातचीत चल रही है तो दूसरी तरफ उसे जमीन से लेकर हवा और समुद्र में भी घेरने की तैयारियां जोरों पर हैं। एक तरफ चीन की सीमा पर थल सेना और वायु सेना ने तैनाती बढ़ा दी है तो नौसेना मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ लगातार युद्धाभ्यास कर रही है। वहीं भारतीय सेना की तैयारियों का लगातार जायजा भी लिया जा रहा है। इसी क्रम में आज नौसेना के टॉप कमांडरों की तीन दिवसीय सम्मेलन शुरू होने जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि सम्मेलन का प्रमुख जोर भारतीय नौसेना की तैयारियों के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के सुरक्षा हितों से संबंधित मुद्दों की समीक्षा करना होगा, जहां चीन तेजी से अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है। भारतीय नौसेना ने सीमा विवाद बढ़ने के बाद चीन को स्पष्ट संदेश देने के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में अपने कई युद्धपोतों और पनडुब्बियों की तैनाती की है। भारतीय नौसेना ने एक बयान में कहा, ‘यह सम्मेलन हमारी उत्तरी सीमाओं पर हाल की घटनाओं और कोविड-19 के चलते उत्पन्न अभूतपूर्व चुनौतियों की पृष्ठभूमि में अधिक महत्व रखता है।’
इसमें कहा गया है कि नौसेना के कमांडर सेना के तीनों अंगों के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के साथ ही दक्षता में सुधार करने के लिए नौसेना में कार्यात्मक पुनर्गठन पर भी विचार-विमर्श करेंगे। साथ ही सम्मेलन में हिंद-प्रशांत में बड़ी सुरक्षा जरूरतों पर भी चर्चा होगी। कमांडर-इन-चीफ के साथ चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल करमबीर सिंह नौसेना में संचालन, साजो-सामान, मानव संसाधन, प्रशिक्षण और प्रशासनिक गतिविधियों की समीक्षा करेंगे जो वर्ष के दौरान हुई हैं और भविष्य के कदमों पर भी विचार-विमर्श करेंगे। रक्षा मंत्रालय में सैन्य मामलों का विभाग (Department of Military Affairs यानी DMA) बनने और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद सृजित होने के बाद नौसेना कमांडरों का यह पहला सम्मेलन है।
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