J&K: अच्‍छे बर्ताव की शर्त पर कश्‍मीर में 504 अलगाववादी रिहा, 370 निरस्‍त होने के बाद से थे हिरासत में

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Edited By Alok Bhadouria | एजेंसियां | Updated:

दिलबाग सिंह (फाइल फोटो)दिलबाग सिंह (फाइल फोटो)
हाइलाइट्स

  • जम्‍मू-कश्‍मीर में 504 अलगाववादी नेताओं को ‘अच्‍छे बर्ताव’ के मुचलके पर हस्ताक्षर करने के बाद रिहा कर दिया गया है
  • दूसरे राज्यों में जेलों में भेजे गए 350 अलगाववादी नेता और पथराव करने वालों में से केवल 50-60 ही जेल में हैं
  • जिन लोगों ने ‘अच्छे बर्ताव’ के मुचलके पर साइन किए हैं उन्हें जेलों या घर में नजरबंदी से रिहा होने के बाद शांति बनाए रखनी होगी

श्रीनगर

एक साल पहले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को निरस्त करने के बाद हिरासत में लिए गए 504 अलगाववादी नेताओं को ‘अच्‍छे बर्ताव’ के मुचलके पर हस्ताक्षर करने के बाद रिहा कर दिया गया है। गुरुवार को

जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह ने बताया कि दूसरे राज्यों में जेलों में भेजे गए 350 अलगाववादी नेता और पथराव करने वालों में से केवल 50-60 ही जेल में हैं और बाकी को रिहा कर दिया गया है।

रिहा होने वाले ये 504 अलगाववादी नेता हुर्रियत कॉन्‍फ्रेंस और जमात-ए-इस्लामी (जेके) के हैं। जिन लोगों ने ‘अच्छे बर्ताव’ के मुचलके पर साइन किए हैं उन्हें जेलों या घर में नजरबंदी से रिहा होने के बाद शांति बनाए रखनी होगी और वे किसी हिंसक या अलगाववादी गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते।

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ड्रोन से हथियार भेज रहा है पाक

दिलबाग सिंह ने बताया कि अब पाकिस्‍तान ने सीमापार से जम्‍मू-कश्‍मीर में हथियार और गोलाबारूद भेजने के लिए ड्रोन इस्‍तेमाल करने की रणनीति शुरू की है। हाल ही में कुपवाड़ा, हीरानगर, कठुआ और रजौरी में ऐसे ड्रोन मार गिराए गए। फिलहाल घाटी में मौजूद आतंकवादियों को हथियार ओर गोलाबारूद की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।

‘केवल 26 आतंकवादी ही घुसपैठ कर सके’

उन्‍होंने यह भी कहा कि इस समय जम्‍मू-कश्‍मीर में महज 200 आतंकवादी ही सक्रिय हैं। इस साल केवल 26 आतंकवादी ही सीमापार से घुसपैठ कर पाए हैं। साल 2020 के पहले सात महीनों में पाकिस्‍तान की ओर से बॉर्डर पर होने वाली फायरिंग में 75 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई है। फायरिंग की आड़ में पाकिस्‍तान आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की फिराक में है।

भविष्‍य की रणनीति पर भी विचार

जम्मू कश्मीर में आतंकवाद से निपटने की भविष्य की रणनीति के बारे में सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के साथ लगी सीमा पर तकनीकी निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि आतंकवादी भारत में घुस न सके और युवाओं को कट्टरपंथ से बाहर लाने के प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि साथ ही युवाओं के कौशल विकास का कार्यक्रम चलाना चाहिए।

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