India-China Faceoff: चीन को मिलेगा करारा जवाब, भारत ने शुरू किया प्रोजेक्ट ‘चीता’

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Edited By Vineet Tripathi | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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हाइलाइट्स

  • चीन को जवाब देने के लिए भारत ने तैयारी पूरी की
  • LAC पर चीन बार-बार उकसावे वाली हरकतों से बाज नहीं आ रहा
  • भारतीय सशस्त्र बल अपने हेरॉन ड्रोन को लेजर गाइडेड बम से लैस करने की योजना बना रहे

नई दिल्ली

भारत और चीन (India-China Faceoff) के बीच सीमा पर तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है लेकिन चीन हर समझौते को दरकिनार कर देता है। चीनी सेना की बार-बार उकसावे वाली हरकतों को माकूल जवाब देने के लिए भारतीय सेना (Indian Army) ने भी तैयारी शुरू कर दी है। भारतीय सशस्त्र बल अपने हेरॉन ड्रोन को लेजर गाइडेड बम (Israeli drone fleet with laser guided bombs) और एंटी टैंक मिसाइल जैसी क्षमताओं से लैस करने की योजना बना रहे हैं। इससे LAC पार दुश्मन के नापाक इरादों को नेस्तानुबूत करने में मदद मिलेगी।

तीनों सेनाएं कर रही हैं इस्तेमाल

इजरायली हेरॉन ड्रोन का इस्तेमाल वर्तमान में भारत की तीनों सेनाएं कर रही हैं। सशस्त्र बलों ने इसके लिए ‘प्रोजेक्ट चीता’ नाम के प्रस्ताव को फिर शुरू किया है। यह प्रस्ताव काफी समय से लंबित है और इस पर 3500 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत आने का अनुमान है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार सूत्रों ने बताया, ‘इस प्रोजेक्ट के तहत लगभग तीनों सेनाओं के 90 हेरॉन ड्रोन को लेजर गाइडेड बम, हवा से जमीन में और हवा में मार कर सकने वाली एंटी टैंक मिसाइलों से लैस कर अपग्रेड किया जाएगा।’

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इजरायली हेरॉन ड्रोन और उकरण शामिल

इस प्रोजेक्ट में सशस्त्र बलों ने ड्रोन को मजबूत निगरानी सिस्टम से लैस करने का प्रस्ताव है। इससे भारतीय बलों को दुश्मन की स्थिति जानने में मदद मिलेगी और इसमें लैस हथियारों से जरूरत पड़ने पर उन्हें तबाह भी किया जा सकेगा। भारत के मध्यम ऊंचाई वाले और लंबी क्षमतओं वाले ड्रोन या अनमैन्ड एरियल व्हीकल के बेड़े में मुख्यत: इजरायली हेरॉन ड्रोन और उकरण शामिल हैं।

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लद्दाख सेक्टर में अग्रिम स्थानों पर तैनात किया

इन ड्रोन्स को थल सेना और वायु सेना दोनों ने ही चीन के साथ सीमा के पास लद्दाख सेक्टर में अग्रिम स्थानों पर तैनात किया है। ये ड्रोन चीनी सेना के पीछे हटने की स्थिति को पुष्ट करने में और गहराई वाले इलाकों में उनके द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों की जानकारी पाने में भी मदद कर रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि इन अपग्रेडेड ड्रोन का इस्तेमाल पारंपरिक सैन्य गतिविधियों और भविष्य में आंतक के खिलाफ भी किया जा सकेगा।

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