In Depth : 101 रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक, क्या है मकसद? क्या होगा असर

[ad_1]

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

In Depth : 101 रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक, क्या है मकसद? क्या होगा असररक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत अहम घोषणा की है। रक्षा वस्तुओं का उत्पादन बढ़ाने के लिए 101 उपकरणों के आयात पर रोक लगाई जाएगी। रविवार को सिंह ने ट्वीट किया कि जो 101 वस्‍तुएं चिन्हित की गई हैं, उनमें बड़ी बंदूकों से लेकर मिसाइल तक शामिल हैं। सिंह का कहना है कि इस फैसले से भारतीय रक्षा उद्योग को बड़े अवसर मिलेंगे। रक्षा मंत्री के मुताबिक, आयात पर रोक लगाने की यह कवायद 2020 से 2024 के बीच पूरी की जाएगी। आने वाले वक्‍त में और वस्‍तुओं को इस लिस्‍ट में जोड़ा जा सकता है। घरेलू स्‍तर पर इन वस्‍तुओं के उत्‍पादन की समयसीमा सुनिश्चित हो, इसके लिए भी कदम उठाए जाएंगे। आइए जानते हैं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की इस घोषणा का मकसद क्‍या है और इससे डिफेंस सेक्‍टर पर क्‍या असर होगा।

क्‍या है इस फैसले का मकसद?

NBT

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ की बात कर चुके हैं, यह उस दिशा में एक बड़ा कदम है। भारत उन देशों में शामिल हैं जो दुनिया में सबसे ज्‍यादा हथियारों का आयात करते हैं। 2015-2019 के बीच विदेशों से हथियार आयात करने के मामले में भारत का नंबर सऊदी अरब के बाद दूसरा था। दुनियाभर के कुल आर्म्‍स इम्‍पोर्ट में भारत का हिस्‍सा 9.2% है। इससे अंदाजा लगाइए कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे देशों पर कितना निर्भर है। इसी निर्भरता को कम करने के लिए यह फैसला किया गया है।

लिस्‍ट किसलिए जारी की है?

NBT

रक्षा मंत्रालय ने जिन 101 उत्‍पादों की लिस्‍ट जारी की है, उनमें सामान्‍य उपकरणों से लेकर हाई-एंड इक्विपमेंट्स तक शामिल हैं। इस लिस्‍ट का मकसद भारतीय डिफेंस इंडस्‍ट्री को यह जताना है कि सेनाओं को किन-किन चीजों की जरूरत है ताकि वह खुद को इसके लिए तैयार कर सकें। रक्षा मंत्रालय ने अगले 6-7 साल में घरेलू इंडस्‍ट्री को करीब 4 लाख करोड़ रुपये के ठेके देने की योजना बनाई है।

आर्मी हो या नेवी, सबकी जरूरत होगी पूरी

NBT

यह लिस्‍ट अचानक ही तैयार नहीं हुई, इसके पीछे कई दौर की बातचीत है। सेना, नौसेना, वायुसेना के अलावा डीआरडीओ, डिफेंस पीएसयू, ऑर्डिनेंस फैक्‍ट्री बोर्ड और प्राइवेट इंडस्‍ट्री से भी कंसल्‍ट किया गया है। यानी पूरी तैयारी के बाद ही यह कदम उठाया गया है। देश में किन आर्म्‍स, इक्विपमेंट्स और प्‍लैटफॉर्म्‍स का प्रॉडक्‍शन तेजी से हो सकता है, इसकी जानकारी करने के बाद ही लिस्‍ट बनाई गई है ताकि फैसले से भारत की रक्षा क्षमता प्रभावित न हो।

इस फैसले का असर क्‍या होगा?

NBT

डिफेंस सेक्‍टर को लेकर दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता तो कम होगी ही, इस फैसले से डिफेंस इंडस्‍ट्री में नई जान फूंकी जा सकती है। सेना की जरूरतें पूरी करने के लिए दूसरे देशों से महंगे दाम पर सामान नहीं मंगाना पड़ेगा, साथ ही तकनीकी सुरक्षा की चिंता भी कम होगी। भारत की तकनीकी दक्षता में इजाफे के साथ-साथ अगर हमारी जरूरतें पूरी होती हैं तो हम एक्‍सपोर्ट की ओर तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। इसी साल फरवरी में, केंद्र सरकार ने राज्‍यसभा में बताया था कि पिछले दो साल में हमारा डिफेंस एक्‍सपोर्ट 700 प्रतिशत बढ़ा है। OFB की तरफ से अमेरिका, जर्मनी, बांग्‍लादेश, जर्मनी, इजरायल जैसे देशों को हथियार और गोला-बारूद के अलावा वेपन स्‍पेयर्स, पैराशूट्स, लेटर और क्‍लोदिंग आइटम्‍स भी सप्‍लाई किए जाते हैं। ताजा फैसले से प्राइवेट इंडस्‍ट्री को भी उत्‍पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

[ad_2]

Source link

Tags:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *