Corona testing in India : भारत में बढ़ रही है कोरोना टेस्ट की रफ्तार, फिर भी दुनिया के मुकाबले बहुत कम

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नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

Corona testing in India : भारत में बढ़ रही है कोरोना टेस्ट की रफ्तार, फिर भी दुनिया के मुकाबले बहुत कमअभी देशभर में 1,310 टेस्टिंग लैब हैं। 1 जनवरी को देश में सिर्फ एक लैब था जहां कोरोना की जांच होती थी। स्वाभाविक है कि भारत में कोविड-19 महामारी के लिए टेस्टिंग में तेजी आई है। हालांकि, दूसरे देशों के मुकाबले यहां इसकी रफ्तार अब भी धीमी है। अगर महामारी से प्रभावित टॉप 20 देशों की बात करें तो सिर्फ पाकिस्तान, मेक्सिको और बांग्लादेश ही प्रति 10 लाख की आबादी पर जांच की दर के मामले में भारत से पीछे हैं।

24 घंटे में 4,77,023 टेस्ट

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भारत अपनी प्रति 10 लाख आबादी पर सिर्फ 18 हजार लोगों से भी कम की ही टेस्टिंग कर पाया है। यूके में भारत के मुकाबले 15 गुना यानी प्रति 10 लाख की आबादी पर 2.7 लाख टेस्ट हुए हैं। वहीं, अमेरिका और रूस में यह आंकड़ा करीब 2 लाख का है। अमेरिका और रूस ने अपने हर पांच में से एक नागरिक की जांच कर ली है जबकि भारत अपने हर 50 में से एक नागरिक की जांच कर पाया है।

यूके में भारत से 15 गुना टेस्ट

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इन टॉप 20 देशों का संयुक्त औसत प्रति 10 लाख की आबादी पर 62 हजार से थोड़े ज्यादा टेस्ट का है जो भारत के औसत से 3.5 गुना है। अगर भारत टॉप 20 देशों के औसत की बराबरी कर ले तो मौजूदा पॉजिटिविटी रेट (प्रति 100 जांच पर कन्फर्म्ड केस की संख्या) से भी यहां प्रति 10 लाख की आबादी पर 5,600 कोरोना केस आएंगे। वहीं, इन शीर्ष 20 देशों में प्रति 10 लाख की आबादी पर सिर्फ 5 हजार कन्फर्म्ड केस ही आ रहे हैं।

दिल्ली में बिहार के मुकाबले सात गुना टेस्ट

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बड़े राज्यों में दिल्ली ने प्रति 10 लाख की आबादी पर औसतन 59 हजार टेस्ट किए जबकि जम्मू-कश्मीर बड़े राज्यों में अकेला ऐसा प्रदेश है जहां प्रति 10 लाख 50 हजार से ज्यादा टेस्ट हुए हैं। बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्यों में राष्ट्रीय औसत से कम जांच हुई है। वहीं, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और पंजाब में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा टेस्ट किए गए। हालांकि, इन राज्यों में भी वैश्विक औसत से बहुत कम जांच हुई है।

किन राज्यों में कितने लैब

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भारत के विभिन्न राज्यों में कोरोना जांच की दर भी अलग-अलग है। मसलन, अगर गोवा ने प्रति 10 लाख की आबादी पर 96 हजा जांच की है तो बिहार ने सिर्फ 8,424 टेस्ट किए। यानी, गोवा के मुकाबले बिहार में औसतन 10 गुना कम केस हुए। वहीं, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और असम में भी अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा टेस्टिंग हो रही है।

इन राज्यों में कम टेस्ट

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दरअसल, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में टेस्टिंग की सुविधा कम है। इससे जांच रिपोर्ट आने में देरी होती है। भारत के पूर्वी राज्यों में जनसंख्या ज्यादा होने के कारण यहां उपलब्ध टेस्टिंग फसिलिटी कम पड़ जा रही है। कई कोविड-19 लैब्स तो सिर्फ स्वाब इकट्ठा करते हैं। नमूनों को जांच के लिए दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में भेजना पड़ता है। कोलकाता जैसे बड़े शहर की स्थिति भी यही है। वहां भी पर्याप्त संख्या में लैब नहीं हैं।

किन राज्यों में कितने टेस्ट

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टेस्ट और डायग्नोसिस में देरी से कई बार रिपोर्ट आने में 72 घंटे तक की देरी हो जा रही है। इस दौरान संक्रमित व्यक्ति कई लोगों को खतरे में डाल सकता है। रिपोर्ट आने में देरी के कारण मरीज को अलग-थलग करने और उसके संपर्क में आए लोगों की तलाश करने में भी देर होती है जिसके कारण महामारी को रफ्तार पकड़ने का मौका मिल जाता है।

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