Bihar vidhansabha chunav 2020 : NDA में मांझी को मिलेगा क्या, चिराग को कितनी सीटों से करना होगा संतोष, जानें सीट शेयरिंग का क्या हो सकता है फॉर्म्युला

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हाइलाइट्स:

  • बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में सीट शेयरिंग पर लोकसभा चुनाव 2019 का फार्मूला अपनाएगी NDA
  • जीतन राम मांझी के एनडीए में शामिल होने से एलजेपी को होगा घाटा
  • आरजेडी का दावा कुछ ही दिनों में NDA से बाहर होगी एलजेपी
  • अभी और टूटेगा महागठबंधन तेजस्वी यादव का नेतृत्व स्वीकार नही महागठबंधन के घटक दलों को – जेडीयू

नीलकमल, पटना
पूरी तरह से इलेक्शन मोड में आ चुके एनडीए के घटक दलों ने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। बीजेपी ने जहां बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी दो महीने पहले ही शुरू कर दी थी। वहीं जेडीयू की ओर से भी अब चुनावी तैयारी को लेकर सक्रियता देखी जा सकती है। हालांकि एनडीए में शामिल एलजेपी को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा है कि एलजेपी प्रमुख ने चिराग पासवान ने जिस प्रकार नीतीश के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, आने वाले समय में एलजेपी खुद को एनडीए से अलग कर सकती है। यानी, जिस प्रकार महागठबंधन से जीतनराम मांझी अलग हुए थे ठीक उसी प्रकार कुछ दिनों में चिराग पासवान भी एनडीए से अलग हो सकते हैं।

क्या सुलझ गया है एलजेपी और जेडीयू के बीच का मामला
बिहार बीजेपी के दो दिवसीय कार्यसमिति को संबोधित करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA बिहार विधानसभा चुनाव में एक बार फिर बड़ी जीत हासिल करेगी। बीजेपी की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि एनडीए मजबूत है और हमारे यहां चेहरे और सीट को लेकर कोई विवाद नहीं है।

बीजेपी की ओर से यह भी कहा गया है कि एनडीए में फिलहाल सीट को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। लेकिन सीट बंटवारे के काम जल्द ही बिना किसी विवाद के पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि बीजेपी के सूत्र बताते हैं कि एलजेपी के रुख को लेकर जेडीयू के साथ-साथ बीजेपी के भी कुछ नेता नाराज है, लेकिन उनका यह भी कहना है जेडीयू- एलजेपी के बीच के विवाद को खत्म कर दिया गया है। लिहाजा अब एनडीए में सीट और नेतृत्व को लेकर कोई मसला नहीं है।

क्या होगा एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर फॉर्म्युला
मिशन 2020 को लेकर चुनावी अखाड़े में उतर चुके एनडीए में फिलहाल सीट बंटवारे को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। बीजेपी के नेताओं का कहना है एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर कोई विवाद नहीं है और सही वक्त पर सीटों का बंटवारा भी कर लिया जाएगा। अब सवाल यह उठता है कि अगर सीटों का बंटवारा होगा तब ज्यादा सीट को लेकर दबाव डालने वाले एलजेपी को इस बार कितने सीट दिए जाएंगे।

इससे भी बड़ा सवाल यह है कि अगर जीतन राम मांझी एनडीए में शामिल होते हैं तो, क्या एलजेपी NDA से बाहर हो सकती है। अगर एलजेपी और जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा दोनों एनडीए में रहते हैं तो, इन दोनों को कितनी सीटें भी जा सकती हैं।

सूत्रों की माने तो एनडीए में एलजेपी और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के रहने पर, 105 – 105 सीटों पर जेडीयू और बीजेपी चुनाव लड़ेगी। शेष 33 सीटों में से 23 सीट एलजेपी और 10 सीट मांझी के पार्टी को मिल सकती है। अगर जीतनराम मांझी दोनो गठबंधन से अलग रहते हुए किसी थर्ड फ्रंट में शामिल होते हैं तो, बीजेपी और जेडीयू 110-110 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सूत्र की माने तो बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा 2019 के लोकसभा के चुनाव की तरह ही होना है। यानी विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी और जेडीयू बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

NDA मतलब निगेटिव डिफेक्टिव अलायंस : आरजेडी
हालांकि महागठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा और महागठबंधन में सीटों का बंटवारा कब होगा यह अभी तक तय नहीं है। बावजूद इसके आरजेडी नेता और प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने NDA पर तंज कसते हुए कहा है कि सीट बंटवारे को लेकर एनडीए के भीतर घमासान मचा हुआ है। एक तरफ जेडीयू अपने घटक दल एलजेपी को भाव नहीं दे रही।

दूसरी तरफ बीजेपी की ओर से भी एलजीपी को कोई तवज्जो नहीं जा रही। आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि NDA का मतलब ही है निगेटिव डिफेक्टिव अलायंस। उन्होंने दावा किया कि कुछ दिनों में NDA बिखर जाएगा। क्योंकि एलजेपी ने एनडीए से बाहर निकलने का मन बना लिया है। आरजेडी के इस बयान पर पलटवार करते हुए जेडीयू नेता और प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि एनडीए गठबंधन मजबूती के साथ खड़ा है और हमारे यहां नेतृत्व और सीट बंटवारे को लेकर कोई विवाद नहीं है।

जेडीयू नेता ने कहा कि आरजेडी को पहले अपने गठबंधन की ओर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के अंदर मचे घमासान की वजह से जीतन राम मांझी जैसे सीनियर नेता बाहर निकल गए। महागठबंधन में सीट शेयरिंग और चेहरे को लेकर खींचतान है। जेडीयू नेता ने कहा कि महागठबंधन का कोई भी घटक दल तेजस्वी यादव के नेतृत्व को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। राजीव रंजन ने यह भी दावा किया कि आने वाले कुछ दिनों में महागठबंधन में शामिल और भी दल गठबंधन छोड़ सकते हैं।

कोरोना महामारी के कारण परंपरागत चुनाव प्रचार के बजाय डिजिटल प्रचार पर जोर
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 को लेकर बीजेपी अपनी रणनीति तैयार कर चुकी है। इसी महीने की 25 तारीख से बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं का बिहार दौरा भी शुरू हो रहा है। चुनाव के इस मौसम में बीजेपी अपने कई दिग्गजों को विधानसभा चुनाव के दौरान जनता के बीच ले जाने का कार्यक्रम तय किया है। हालांकि कोरोना काल में बड़ी सभा का आयोजन तो नहीं होंगे लेकिन, बीजेपी के राष्ट्रीय नेता बिहार पहुंचकर छोटी सभा को संबोधित करेंगे।
राष्ट्रीय नेताओं के भाषण को बिहार के लोग डिजिटल माध्यम से सुन सकें की पूरी तैयारी बीजेपी ने कर रखी है। इधर एनडीए के घटक दल जेडीयू ने भी खुद को डिजिटली मजबूत कर लिया है। आने वाले कुछ दिनों में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बड़ी वर्चुअल रैली को संबोधित करेंगे। बताया जा रहा है कि जेडीयू ने कोरोना काल को देखते हुए, नीतीश कुमार के वर्चुअल रैली में 10 लाख लोगों को जोड़ने की व्यवस्था की है।

बात अगर महागठबंधन की करें तो आरजेडी में चुनाव आयोग से परंपरागत चुनाव प्रचार और परंपरागत तरीके से ही चुनाव कराने की मांग की है। लेकिन महागठबंधन में शामिल कांग्रेस खुद को डिजिटल रूप से तैयार कर चुकी है। दूसरी ओर महागठबंधन में शामिल आरएलएसपी यानी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और वीआईपी जैसी पार्टियां डिजिटल माध्यम के प्रयोग में पिछड़ी नजर आती है।

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