Bihar Election 2020: LJP से ‘अनबन’ और मांझी से JDU का ‘प्रेम’, बिहार में बन रहा नया समीकरण!

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पटना
बिहार में इस साल होने वाले संभावित विधानसभा चुनाव को लेकर अब राजनीतिक पार्टियां और उनके नेता अपने नए साथी की तलाश में जहां अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नफा-नुकसान में जुट गए हैं, वहीं राज्य में नए समीकरण को भी बल मिल रहा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल जेडीयू और एलजेपी के बीच जहां दिनों दिन तल्खी बढ़ती दिख रही है, वहीं विपक्षी दल के महागठबंधन में शामिल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) की नजदीकी भी जेडीयू से बढ़ती जा रही है। हालांकि बीजेपी ने अभी इसे लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

बिहार में हालांकि बीजेपी और जेडीयू को छोड़कर कोई भी दल कोरोना काल में चुनाव कराने के पक्ष में नहीं दिख रहा है, लेकिन चुनाव आयोग की चुनाव कराने की तैयारी को देखते हुए सभी दलों ने चुनाव को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। यही वजह है कि राजनीतिक दल और नेता अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नए ठिकाने की तलाश में जुटे हुए हैं।

चिराग पासवान सार्वजनिक मंच से उठा चुके हैं बिहार सरकार की कमियां
एलजेपी के प्रमुख चिराग पासवान लगातार बिहार सरकार में कमियों को सार्वजनिक मंचों से उठाकर जेडीयू से अपनी दूरी को मतदाताओं के बीच ला चुके हैं। चुनाव की आहट सुनकर चिराग स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अचानक पटना पहुंचे और अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर आगे की रणनीति बना ली है। कहा जा रहा है कि ही जल्द ही एलजेपी की संसदीय दल की बैठक होनी है, जिसमें भविष्य को लेकर कुछ आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। वैसे, चिराग पासवान दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा से भी मिलकर अपनी बात रख चुके हैं।

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चुनाव में ज्यादा सीटें चाहती है एलजेपी!
नाम न छापने की शर्त पर एलजेपी के एक नेता कहते भी हैं, “उनका गठबंधन बीजेपी से है। जेडीयू तो गठबंधन में बाद में शामिल हुआ है।” सूत्र बताते हैं कि जेडीयू की तरफ से एलजेपी को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिस कारण एलजेपी नाराज है। कहा जा रहा है कि एनडीए में होने के बावजूद जेडीयू की तरफ से विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे में एलजेपी की अनदेखी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि एलजेपी चाहती है कि हर हाल में 2015 के विधानसभा चुनाव या 2019 के लोकसभा चुनाव के आधार पर सम्मानजनक सीटें मिलें।

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एलजेपी को नाराज नहीं करना चाहती है जेडीयू!
चिराग इस बीच जन अधिकार पार्टी के प्रमुख पप्पू यादव से भी मिल चुके हैं। जबकि पप्पू यादव किसी दलित को बिहार के मुख्यमंत्री बनाने को लेकर अभियान चला रहे हैं। वैसे, सूत्र यह भी कहते हैं कि जेडीयू, केंद्रीय मंत्री रामविलास पासावन की पार्टी एलजेपी को नाराज नहीं करना चाहती है। पासवान की पहचान बिहार की सियासत में एक दलित नेता की रही है। जेडीयू से नाराजगी के बाद मंत्री रहे श्याम रजक भी आरजेडी में चले गए हैं।

मांझी को लेकर दिख रहा जेडीयू का प्रेम
जेडीयू हालांकि इस समीकरण को दुरुस्त करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को अपने पाले में लाने को लेकर व्यग्र दिख रही है। मांझी भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते नजर आ रहे हैं। वैसे, बीजेपी अभी तक ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है। बीजेपी, बिहार में किसी भी सहयोगी दल को फिलहाल नाराज नहीं करना चाहती है। बीजेपी के नेता हालांकि खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं, लेकिन इतना जरूर कह रहे हैं कि एनडीए एकजुट है और सभी दल चुनाव की तैयारी में जुटे हैं।

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