Analysis: क्या उत्तर प्रदेश से संभाली जाएगी इस बार बिहार चुनाव की कमान?

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लखनऊ. चुनाव बिहार में है लेकिन उत्तर प्रदेश भी चुनावी मोड में आता दिख रहा है. जहां विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर है. उधर, सोशल मीडिया (Social Media) के माध्यम से समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) बाइस में बाइसिकिल की बात कर रहे हैं तो कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी लगातार कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को घेर रही हैं. बसपा सुप्रीमो भी सोशल मीडिया पर एक्टिव नजर आ रही हैं, लेकिन बीजेपी से ज्यादा सपा बसपा पर ही हमलावर नजर आ रही हैं. इन सबसे इतर सत्ताधारी पार्टी भाजपा उत्तर प्रदेश की राजनीति करते हुए भी बिहार चुनाव को साधने की जुगत भिड़ा रही है.

आपको बता दें कि एक अरसे से जयश्रीराम के नारे के सहारे राजनैतिक यात्रा तय करने वाली बीजेपी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त को अयोध्या में बहुप्रचारित भूमिपूजन समारोह में अपने पारंपरिक नारे जयश्रीराम की जगह सियापति रामचंद्रजी की जय का जयकारा लगाकर बिहार चुनाव के लिए महत्वपूर्ण राजनौतिक संदेश दिया. क्योंकि समूचे बिहार के सांस्कृतिक परिदृश्य में सियापति रामचंद्र की जय परंपरा से सामाजिक सर्वस्वीकृत धार्मिक उद्घोष रहा है. माता सीता का मिथिला की बेटी होना इस अवधारणा की जड़ में रहा है.

राममंदिर निर्माण और मनोज सिन्हा की नियुक्ति 

राममंदिर निर्माण से प्रधानमंत्री ये संदेश देने में काफी हद तक सफल नजर आ रहे हैं कि हम तमाम झंझावतों को सहते हुए बिहार की बेटी माता सीता को सपरिवार टेंट से निकालकर मंदिर रुपी घर तक पहुंचाने में सफल हुए. जम्मू कश्मीर जैसे राष्ट्रीय स्तर पर सबसे चर्चित प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण पद राज्यपाल पर उत्तर प्रदेश के पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा की नियुक्ति कर भाजपा ने बिहार चुनावों के मद्देनजर एक बहुत गहरा कदम उठाया है.ब्राह्मण और निषाद वोट बैंक पर नजर

बिहार के सामाजिक राजनैतिक परिदृश्य में भूमिहारों की सशक्त स्थिति को देखते हुए इसी जाति से आने वाले मनोज सिन्हा की नियुक्ति को इस जाति के लिए सकारात्मक संदेश के रुप में देखा जा रहा है.
एक तरफ उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर विपक्ष में होड़ मची है. ऐसी स्थिति में भी बीजेपी राज्यसभा प्रत्याशी के रूप जयप्रकाश निषाद को उतारकर एक बार फिर से साफ कर दिया है कि बिहार चुनाव पार्टी के लिए कितना महत्वपूर्ण है.

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बिहार में बीजेपी के लिए चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण जिलों में निषाद (मल्लाह और केवट) समुदाय की बड़ी जनसंख्या को जयप्रकाश निषाद की उम्मीदवारी से साधने की कोशिश की गई है. मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी, हाजीपुर जैसे कई बड़े जिलों में निषाद समुदाय की वोटरों की आबादी है. वरिष्ठ पत्रकार अनिल भारद्वाज कहते हैं कि निषाद वोटर्स की बड़ी संख्या को ध्यान में रखते हुए ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में अभी जारी ब्राह्मण वोटों को साधने के लिए हो रही मारामारी के बीच भी बीजेपी ने निषाद उम्मीदवार बनाया है.

सबका विकास और सबका विश्वास का नारा- बीजेपी

दूसरी तरफ बीजेपी नेता विजयबहादुर पाठक कहते हैं कि बीजेपी हमेशा से राजनैतिक क्षेत्र में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास इस नीति पर चलते हुए कार्य भी करती रही है और निर्णय भी लेती रही है यह कोई नई बात नहीं है. लेकिन कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत कहते हैं कि अब स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री जनता के हितों के लिए काम न करके, भारतीय जनता पार्टी के चुनावी हितों के लिए काम कर रहे हैं. देश के पीमए से अपेक्षा की जाती है कि वो देश के गरीबों, नौजवानों, किसानों और बेरोगारों के लिए काम करेंगे, लेकिन वो इसपर खड़े नहीं उतर रहे हैं. सरकार की विफलता छिपाने के लिए बीजेपी प्रतीकों की राजनीति कर रही है.



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