2019 में पीएम मोदी के ‘प्रस्तावक’ रहे डोम राजा का निधन, जानें डोम बिरादरी का अतीत

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हाइलाइट्स:

  • वाराणसी के डोमराजा चौधरी का निधन, चुनाव में पीएम के प्रस्तावक थे
  • डोमराजा जगदीश चौधरी बनारस की चर्चित डोम बिरादरी से आते हैं
  • प्रस्तावक बनने पर कहा था कि पहली बार हमें नई पहचान मिली है
  • काशी में डोम बिरादरी से जुड़े 5 हजार लोग, कालू डोम की कथा चर्चित

अभिषेक जायसवाल, वाराणसी
वाराणसी के डोम राजा जगदीश चौधरी का मंगलवार की सुबह निधन हो गया। शहर के सिगरा स्थित निजी अस्पताल में इलाज के दौरान डोम राजा ने आखिरी सांसें लीं। परिजनों के मुताबित सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया। भर्ती होने के कुछ समय के बाद ही उनकी मौत हो गई। जानकारी के मुताबित डोमराजा लंबे समय से जांघ में घाव की समस्या से परेशान थे।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने डोमराजा के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। सीएम योगी ने ट्वीट में कहा, ‘सामाजिक समरसता की भावना के प्रतीक पुरुष, काशीवासी डोमराजा श्री जगदीश चौधरी जी का निधन अत्यंत दुःखद है। श्री जगदीश चौधरी जी का कैलाशगमन सम्पूर्ण भारतीय समाज की एक बड़ी क्षति है। बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना है कि आपको अपने परमधाम में स्थान प्रदान करें।’

पीएम मोदी का प्रस्तावक बनने पर यह कहा था
2019 के लोकसभा चुनाव में जगदीश चौधरी पीएम नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक भी बने थे। पहली बार ऐसा हुआ था जब किसी राजनैतिक दल ने डोम राजा परिवार के सदस्य को चुुनाव में प्रस्तावक बनाया था। तब जगदीश चौधरी ने इस बात को लेकर खुशी का भी इजहार किया था। प्रस्तावक बनाए जाने के बाद उन्होंने कहा था, ‘पहली बार किसी राजनीतिक दल ने हमें यह पहचान दी है और वह भी खुद प्रधानमंत्री ने। हम बरसों से लानत झेलते आए हैं। हालात पहले से सुधरे जरूर हैं, लेकिन समाज में हमें पहचान नहीं मिली है और प्रधानमंत्री चाहेंगे तो हमारी दशा जरूर बेहतर होगी।’

पढ़ें: मोदी के प्रस्तावक बन खुश, बनारस के डोमराजा की कहानी

घर पर लोगों का जमावड़ा
डोमराजा जगदीश चौधरी के निधन के बाद मीरघाट स्थित उनके आवास पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। आमजन से लेकर राजनैतिक पार्टी के लोगों के उनके घर पहुंचने का सिलसिला जारी है।

पुराना है डोमराजा का इतिहास
काशी में डोमराजा परिवार का इतिहास सदियों पुराना है। मशहूर मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र श्मशान घाट पर वर्षों से इनके ही परिवार के लोग अंतिम संस्कार के लिए मुखाग्नि देते हैं। काशी में करीब पांच हजार लोग इनकी बिरादरी से जुड़े हैं। वाराणसी के हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट पर ‘राम नाम सत्य है’ का उद्घोष, जलती चिताएं और दर्जनों की तादाद में डोम यहां की पहचान रहे हैं। पौराणिक गाथाओं के अनुसार राजा हरिश्चंद्र ने खुद को श्मशान में चिता जलाने वाले कालू डोम को बेच दिया था। उसके बाद से डोम बिरादरी का प्रमुख यहां डोम राजा कहलाता है। चिता को देने के लिए मुखाग्नि उसी से ली जाती है।

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