सुशांत केस में ड्रग्स ऐंगल के बाद नारकोटिक्‍स ब्यूरो ऐक्शन में, जानिए कौन हैं नार्को चीफ राकेश अस्थाना, लालू से लेकर गोधरा कांड जांच में रहे शामिल

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हाइलाइट्स:

  • सुशांत सिंह केस में ड्रग्स ऐंगल सामने आने पर नार्कोटिक्स ब्यूरो भी जांच में शामिल
  • पूर्व सीबीआई निदेशक राकेश अस्थाना हैं नार्को चीफ, तेजतर्रार ऑफिसर्स में गिनती
  • 23 साल में बने थे IPS, चारा घोटाला केस में लालू की गिरफ्तारी के बाद सुर्खियों में
  • गोधरा कांड, अहदमदाबाद ब्लास्ट, आसाराम बापू जैसे केस की जांच में रहे शामिल

मुंबई
बॉलिवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत के केस में रोज नया मोड़ आ रहा है। अब इस हाई प्रोफाइल मामले में ड्रग्स ऐंगल सामने आया है। रिया चक्रवर्ती के चैट के खुलासे में ड्रग्स (Rhea drugs chat) का जिक्र मिला है। अब इस मामले में सीबीआई के साथ ही नार्कोटिक्स टीम भी शामिल होगी। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के महानिदेशक राकेश अस्थाना (Rakesh Asthana) सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर रह चुके हैं। लालू यादव से लेकर आसाराम बापू और गोधरा कांड की जांच में शामिल रह चुके राकेश अस्थाना कौन हैं, आइए जानते हैं।

सुशांत सिंह राजपूत मामले में ड्रग्स के ऐंगल की जांच करने के लिए नारकोटिक्स एजेंसी की एक टीम दिल्ली से आएगी और मुंबई में जांच कर रही सीबीआई के साथ मिल कर इस मामले में सहयोग करेगी। नार्को चीफ राकेश अस्थाना की गिनती तेजतर्रार ऑफिसर्स में होती है। रांची में जन्मे और वहीं पले-बढ़े अस्थाना मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा के निवासी हैं। दिल्ली के जेएनयू से पढ़ाई करने वाले अस्थाना ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर लिया था और 1984 में गुजरात कैडर के आईपीएस ऑफिसर बन गए। तब उनकी उम्र मात्र 23 वर्ष की थी।

चारा घोटाले में लालू से पूछताछ से सुर्खियों में
राकेश अस्थाना का नाम सुर्खियों में आया साल 1996 में। बिहार में हुए बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में जांच की जिम्मेदारी राकेश अस्थाना को मिली। उस समय लालू के रसूख के आगे कोई भी अधिकारी मामले में हाथ डालने को तैयार नहीं था। ऐसे में राकेश ने कई-कई घंटों तक बैठाकर लालू से पूछताछ की। उन्होंने राजनीति और प्रशासनिक दबाव की परवाह ना करते हुए लालू के खिलाफ चार्जशीट पेश की। इसके बाद 1997 में लालू को जेल जाना पड़ा। इस घटना के बाद राकेश अस्थाना का नाम सुर्खियों में आ गया।

तेजतर्रार अधिकारियों में होती है गिनती
ऐंटी करप्शन ब्यूरो में एसपी रहते हुए राकेश अस्थाना ने धनबाद के डीजीएमएस को घूस लेते हुए गिरफ्तार किया था। ऐसा पहली बार हुआ था कि इस रैंक का अधिकारी घूस लेते हुए पकड़ा गया हो। वह पुरुलिया आर्म्स ड्रॉप केस की फील्ड इन्वेस्टिगेशन सुपरविजन में शामिल थे। रेकॉर्ड समय में जांच पूरी कर मामले का खुलासा करने की खासियत वाले अस्थाना के खाते में 2002 गोधरा कांड और 2008 के अहमदाबाद ब्लास्ट की जांच का मामला भी दर्ज है।

गोधरा कांड और अहमदाबाद ब्लास्ट की जांच
दरअसल 2002 की फरवरी में गुजरात के गोधरा में साबरमती ट्रेन को जलाए जाने के बाद दंगा भड़क उठा था। दंगों की जांच के लिए गठित हुई SIT का नेतृत्व राकेश अस्थाना ने किया था। तब एसआईटी ने कारसेवकों से भरी ट्रेन में सुनियोजित तरीके से आग लगाए जाने की बात कही थी। इसके बाद जुलाई 2008 में अहमदाबाद में सीरियल ब्लास्ट हुआ। बम ब्लास्ट की जांच का जिम्मा राकेश को ही दिया गया था। महज 22 दिनों के अंदर ही ब्लास्ट केस को सुलझाकर राकेश ने मिसाल पेश की थी।

आसाराम बापू रेप मामले की भी की जांच
2014 में आश्रम की बालिका से रेप के मामले में आसाराम बापू और उनके बेटे नारायण साईं की जांच भी राकेश अस्थाना ने की। फरार चल रहे नारायण सांईं को हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर पर पकड़ा गया था। वह सूरत और वडोदरा जैसी प्रमुख जगहों के कमिश्नर भी रह चुके हैं।

घूस लेने के आरोप के कारण विवादों में रहे
साल 2016 में अस्थाना को सीबीआई का अडिशनल डायरेक्टर बनाया गया। हालांकि यहां उनके साथ एक विवाद जुड़ गया, जिसके तहत उन पर सीबीआई ने ही घूसखोरी का मामला दर्ज किया था। हालांकि बाद में उन्हें इस मामले में कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई थी। सीबीआई चीफ आलोक वर्मा के साथ उनके मतभेद भी खुलकर सामने आए थे।

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