राम मंदिर भूमि पूजन: मस्जिद की नींव रखने जाएंगे? सीएम योगी बोले- न बुलाया जाएगा, न जाऊंगा

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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन के साथ ही योगी आदित्यनाथ की खुशी देखते ही बन रही है। वह कहते हैं कि यह पल मेरे लिए बहुत भावुक था। उन्होंने कई मुद्दों पर बेबाकी से जवाब दिया।

Edited By Himanshu Tiwari | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

सीएम योगी ने कहा, मुझे बुलाया ही नहीं जाएगासीएम योगी ने कहा, मुझे बुलाया ही नहीं जाएगा
हाइलाइट्स

  • योगी आदित्यनाथ बोले- राम मंदिर का भूमि पूजन मेरे लिए भावुक, उत्साह-उमंग का क्षण
  • मस्जिद की नींव रखे जाने पर योगी ने कहा, न मुझे बुलाया जाएगा और मैं जाऊंगा भी नहीं
  • प्रियंका गांधी के बयान कि ‘राम सबके हैं’ पर भी योगी आदित्यनाथ ने दिया करारा जवाब

अयोध्या

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण (Ram Mandir Ayodhya) के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भूमि पूजन किया। इस कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath on Ram Mandir) ने राम मंदिर के साथ-साथ विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बात की। मुख्यमंत्री योगी ने मस्जिद की नींव रखे जाने पर भी स्पष्ट जवाब दिया। सीएम योगी ने कहा कि मुझे न तो इस कार्यक्रम में कोई बुलाएगा और मैं जाऊंगा भी नहीं।

दरअसल, एक न्‍यूज चैनल से बातचीत में योगी से सवाल किया गया कि राम मंदिर के भूमि पूजन पर आपने सभी धर्मों के लोगों को बुलाया, वे कार्यक्रम में शामिल भी हुए। ऐसे में कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में जब मस्जिद की नींव रखी जाएगी तो सीएम योगी वहां नहीं जाएंगे। इस पर योगी ने कहा, ‘मेरा जो भी काम है, वह मैं करूंगा। बाकी मुझे न तो वहां बुलाया जाएगा और मैं वहां जाऊंगा भी नहीं।’

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मस्जिद के शिलान्यास पर क्या बोले योगी

‘आज मेरे लिए उमंग और उत्साह का दिन’

योगी ने कहा, ‘यह मेरे लिए भावुक, उत्साह-उमंग, गौरव का भी क्षण था। उत्साह-उमंग का इसीलिए क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार बाहर की सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी यूपी सरकार के पास है। मैंने पिछले 3 वर्षों में इस कार्य को बहुत नजदीक से महसूस किया है। मुझे पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो दायित्व दिया है, उस काम को करने के लिए मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं। मेरी गुरू परंपरा ने यह संकल्प दशकों पूर्व देखा था, यह आज साकार हुआ है, उन दिव्य आत्माओं को इससे असीम शांति मिल रही होगी। मंच पर जितने भी महानुभाव थे, ये सभी राम जन्मभूमि के साथ बहुत आत्मीय रूप से जुड़े रहे हैं। स्वाभाविक रूप से यह दिन हमारे लिए उमंग-उत्साह का दिन भी है।’

1990 की वह रथयात्रा, आडवाणी की गिरफ्तारी

  • 1990 की वह रथयात्रा, आडवाणी की गिरफ्तारी

    असल में पूरा विवाद 1528 से शुरू हुआ था। मुगल बादशाह बाबर ने विवादित जगह पर मस्जिद का निर्माण कार्य कराया। हालांकि, हिंदुओं का दावा था कि यहां पर भगवान राम का जन्म हुआ। बढ़ते विवाद के साथ यहां पर 1949 में भगवान राम की मूर्तियां पाई गईं। इसके बाद विवाद बढ़ता गया और कार्रवाई भी की जाती रही। मंदिर निर्माण आंदोलन के लिए बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने 1990 में गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक के लिए रथ यात्रा शुरू की थी। हालांकि, आडवाणी को बिहार के तत्कालीन सीएम लालू प्रसाद यादव ने समस्तीपुर जिले में गिरफ्तार करवा लिया था। जब पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर अपना फैसला सुनाया था तब आडवाणी ने इसपर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह बड़ी बात है कि ईश्वर ने उन्हें इस आंदोलन से जुड़ने का मौका दिया।

  • आंदोलन को इन नेताओं ने दी धार

    लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी, कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी, अशोक सिंहल, बालासाहेब ठाकरे समेत कई कद्दावर नेता राम मंदिर निर्माण के आंदोलन को लगातार धार देते रहे।

  • राम मंदिर आंदोलन के बीच सुर्खियों में थीं उमा भारती

    राम मंदिर आंदोलन में पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। विवादित ढांचे के विध्वंस की जांच के लिए बने आयोग ने उमा भारती की भूमिका को भी दोषपूर्ण पाया था। दरअसल, अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों की भीड़ ने विवादित ढांचे को गिरा दिया था। उनकी आस्था थी कि किसी प्राचीन मंदिर को ढहाकर वह मस्जिद बनाई गई थी। लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी समेत तमाम बीजेपी नेता उस वक्त राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेता थे।

  • 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट का निर्णय

    वर्ष 2010, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा के बीच 3 बराबर-बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया। फिर वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई।

  • विपक्ष का तंज, 'मंदिर वहीं बनाएंगे लेकिन...'

    वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट का आह्वान किया। बीजेपी के शीर्ष नेताओं पर आपराधिक साजिश के आरोप फिर से बहाल किए। यही नहीं, 8 मार्च 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया। पैनल को 8 सप्ताह के भीतर कार्यवाही खत्म करने को कहा। 1 अगस्त 2019 को मध्यस्थता पैनल ने रिपोर्ट पेश। इस पर 2 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता पैनल मामले का समाधान करने में विफल रहा। इस बीच रामलला अयोध्या में टेंट के भीतर थे। मामला राजनीतिक रंग ले चुका था। विपक्षियों के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नरेंद्र मोदी सरकार पर लगातार तंज जारी थे कि मंदिर वहीं बनाएंगे, पर तारीख नहीं बताएंगे।

  • ...और रामलला के पक्ष में आया फैसला

    70 साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई, 40 दिन तक लगातार मैराथन सुनवाई के बाद 9 नवंबर 2019 को अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया। राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति यानी 5-0 से ऐतिहासिक फैसला सुनाया। निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड को ही पक्षकार माना। टॉप कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा विवादित जमीन को तीन पक्षों में बांटने के फैसले को अतार्किक करार दिया। आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया।

  • वीएचपी के राम मंदिर मॉडल का किस्सा

    वीएचपी ने 8 अक्टूबर 1984 को अयोध्या से राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत की थी। इसके बाद 1989 में प्रस्तावित मॉडल भी वीएचपी ने संतों से स्वीकृत करा लिया था और इसी मॉडल के जरिए वीएचपी ने राम मंदिर को लेकर पूरे देश में जनजागरण अभियान भी चलाया था। पहली बार प्रस्तावित राम मंदिर का मॉडल 2001 के कुंभ में श्रद्धालुओं के लिए लाया गया था। उसके बाद से 2007, 2013 और 2019 के कुंभ के दौरान भी यह मॉडल प्रयागराज में रखा गया था।

  • फिर शुरू हुआ पत्थरों की सफाई का काम

    9 फरवरी 2020 को प्रकाशित खबर के मुताबिक, राम जन्मभूमि न्यास कार्यशाला में तराशे गए पत्थरों की सफाई का कार्य शुरू हो गया। वाराणसी से आए कारीगर रामू ने बताया कि 1 फरवरी से पत्थरों पर लगी कालिख और काई की सफाई का काम चालू हुआ। उस दौरान, इस काम के लिए तीन कारीगरों को रखा गया था।

  • फिर राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का हुआ गठन

    फैसले के साथ ही कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाकर स्कीम बताए। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2020, बुधवार को लोकसभा में राम मंदिर का पूरा प्लान बताया। उन्होंने घोषणा की कि राम मंदिर के लिए बनने वाले ट्रस्ट का नाम ‘श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ होगा। इस ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य होंगे।

  • ट्रस्ट में इन लोगों को किया गया शामिल

    ट्रस्ट के गठन के बाद अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को बनाया गया। इस ट्रस्ट में चंपत राय, नृपेंद्र मिश्र, के. पाराशरण, विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, डॉ. अनिल कुमार मिश्र, महंत दिनेंद्र दास, कामेश्वर चौपाल, अवनीश कुमार अवस्थी, अनुज कुमार झा को शामिल किया गया। ट्रस्ट के गठन के साथ ही अयोध्या को चमकाने का दौर शुरू हो गया।

  • 25 मार्च 2020 को अस्थायी मंदिर में रामलला

    रामलला के अस्थायी मंदिर तैयार किया गया। विशेष पूजा के बीच रामलला को 25 मार्च 2020 को यहां शिफ्ट किया गया। यह कार्य खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।

  • अब दुलहन सी सज गई अयोध्या, रामलला की खास पोशाक

    ट्रस्ट के सदस्यों की बैठक के साथ ही भूमि पूजन की दो तारीखें (3 अगस्त और 5 अगस्त) तय करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी गईं। इसके साथ ही पीएमओ ने 5 अगस्त की तारीख पर मुहर लगा दी। 5 अगस्त को होने वाले भूमि पूजन के लिए अयोध्या को सजा दिया गया है। भगवान रामलला की खास पोशाक तैयार की गई है। विवाद इस पोशाक के रंग पर भी हुआ लेकिन ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने हरे रंग से जुड़े कई जवाबों के साथ सभी को शांत करा दिया। चंपत राय ने कहा कि हरा रंग समृद्धि का प्रतीक है।

  • राम मंदिर का 'महाप्रसाद' लाखों घरों तक

    भूमि पूजन का प्रसाद लाखों घरों तक पहुंचाने की तैयारी है। वहीं, राम मंदिर के निर्माण से पहले शहर की विभिन्न इमारतों को पीला रंग दे दिया गया है। इसके साथ ही धर्म ध्वजा को हजारों की संख्या में लगाया जा रहा है।

  • सरयू तट पर सियावर रामचंद्र की जय

    अयोध्या का कोना-कोना भव्य तरीके से सजा दिया गया है। सुरक्षा के खास इंतजामों के साथ अयोध्या की किलेबंदी की गई है। सरयू के किनारे दीपोत्सव के बीच सियावर रामचंद्र की जय का जयघोष लोगों के उत्साह की गवाही दे रहा है।

  • भूमि पूजन से पहले योगी ने लिखा...

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमि पूजन से पहले यह तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा है, ‘प्रभु श्रीराम के भक्तों का आह्लाद, सनातन संस्कृति का हर्ष-उत्कर्ष और पांच शताब्दियों की प्रतीक्षा का सुफल, धर्मनगरी श्री अयोध्या जी में सहज प्रतिबिंबित हो रहा है। जय श्री राम।’

  • सीएम आवास में दीपोत्सव

    योगी आदित्यनाथ ने 4 अगस्त 2020 को अपने सरकारी आवास 5-कालिदास मार्ग, लखनऊ में राम मंदिर के भूमि पूजन की पूर्व संध्या पर दीपोत्सव का भी आयोजन किया।

  • राम रंग में रंगी अयोध्या

    राम मंदिर के भूमि पूजन को लेकर लोगों में उत्साह दिख रहा है। सोशल मीडिया पर अयोध्या की सजावट की तस्वीरों को लोग जमकर शेयर कर रहे हैं। उधर, अयोध्या के घर-घर को भी ध्वजा के साथ राम के रंग में सराबोर किया जा रहा है।

प्रियंका के ‘राम सबके’पर बोले योगी

उधर, योगी आदित्यनाथ ने प्रियंका गांधी के बयान कि ‘राम सबके हैं’ पर भी जवाब दिया। योगी ने कहा कि राम सभी के हैं, हम पहले से ही यह बात कहते आए हैं। पहले ही यह सदबुद्धि सभी को आ जानी चाहिए थी जब कुछ लोगों के पूर्वजों ने रामलला की मूर्तियों को हटाने की कुत्सित चेष्टा की थी। आखिर कौन लोग थे वो, किसके पूर्वज थे जो अयोध्या में रामलला का मंदिर नहीं चाहते थे। कौन लोग थे वे, जो गर्भगृह जहां आज शिलान्यास हुआ है, 1989 में वहां शिलान्यास न करके वहां से 200 मीटर दूर कह रहे थे कि यहां शिलान्यास करेंगे। कह रहे थे कि विवादित परिसर में कुछ नहीं होना है।’

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‘राम के नाम पर बांटने की कोशिश गलत’

कोरोना वायरस की वजह से प्रोटोकॉल को देखते हुए सभी को नहीं बुलाया जा सके। बाकी इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी किया गया। राम सबके हैं, राम के काम में सभी को सहभागी भी बनना चाहिए। राम के नाम पर बांटने का कुत्सित प्रयास नहीं करना चाहिए। हमने राम के नाम पर राजनीति नहीं की है। हम जिस निष्ठा के साथ 1984 में जुड़े थे, उसी निष्ठा से 2020 में भी जुड़े हुए हैं।’

Video: सीएम योगी ने PM मोदी को भेंट की कोदंड राम की प्रतिमा Video: सीएम योगी ने PM मोदी को भेंट की कोदंड राम की प्रतिमा
Web Title after ram mandir bhoomi poojan in ayodhya know what says yogi adityanath over masjid shilanyas(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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