राजस्थान में ‘हम साथ-साथ’ के साथ कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव के लिए तैयार

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नई दिल्ली
राजस्थान में शुक्रवार से शुरू हो रहे असेंबली सत्र की पूर्व संध्या पर सत्तारूढ़ कांग्रेस ने ‘अंत भला तो सब भला’ की तर्ज पर अपने विधायक दल की मीटिंग की। इस मीटिंग में सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट आपसी मतभेद भुलाकर मुस्कुराते हुए हाथ मिलाते दिखे। यह मीटिंग असेंबली सत्र के पहले उसकी तैयारियों को लेकर अहम समझी जा रही थी, जिसमें सत्र को लेकर बनी रणनीति पर चर्चा हुई।

गुरुवार को बीजेपी ने ऐलान किया है कि वह गहलोत सरकार के खिलाफ अविश्वास सरकार लेकर आएगी। हालांकि गहलोत सरकार को अपने नंबरों पर पूरा भरोसा है। पायलट खेमे के साथ आने पर उसके पास 120 का आंकड़ा हो चुका है। मीटिंग में कांग्रेस के विधायकों के अलावा, कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल, दिल्ली से भेजे गए अजय माकन व राजस्थान के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे भी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि मीटिंग से पहले कांग्रेस क चीफ व्हिप महेश जोशी ने व्हिप जारी कर सभी विधायकों को अनिवार्य रूप से मीटिंग में अपने के लिए कहा। मीटिंग से ऐन पहले कांग्रेस ने अपने निलंबित विधायकों भंवरलाल शर्मा और विश्वेंद्र सिंह का निलंबन खत्म किया, जिसके बाद उन्होंने भी इसमें हिस्सा लिया। वहीं बीएसपी विधायक मामले में कोर्ट से मिली राहत को भी गहलोत सरकार के पक्ष में देखा जा रहा है।

मीटिंग में सब सामान्य दिखाने की कोशिश
मीटिंग में सब सामान्य दिखाने की कोशिश हुई। इससे पहले सीएम गहलोत व सचिन पायलट की मुलाकात हुई। गहलोत-पायलट सहित सभी ने विक्ट्री का साइन दिखाया। जबकि इस मौके सभी नेताओं ने सभी विधायकों को एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि हमारी सरकार पूरी तरह से मजबूत है। इसके बाद सीएम गहलोत की अध्यक्षता में बैठक शुरू हुई, जहां मुख्य रूप से सत्र की तैयारियों पर चर्चा हुई। इस मौके पर गहलोत ने कहा कि जो हुआ, वह भूल जाइए। हम 19 विधायकों के बिना भी बहुमत साबित कर सकते थे, लेकिन वह खुशी नहीं होती। उनका कहना था कि अपने तो अपने होते हैं। गहलोत ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में एक-एक कर चुनी हुई सरकारों को तोड़ने की साजिश चल रही है। कर्नाटक, मध्यप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में सरकारें अस्थिर की गईं, इसके लिए जिस तरह से ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स, जुडिशरी का दुरुपयोग हो रहा है, यह सब लोकतंत्र को कमजोर करने का बहुत खतरनाक खेल है।

कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते गहलोत
गहलोत भले ही अपनी सरकार को लेकर आश्वस्त हों, लेकिन वह कोई कसर नहीं छोड़न चाहते। इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि जैसलमेर से लौटे गहलोत गुट के विधायकों को फिर से सीधे उसी होटल में ठहराया गया, जहां वे पहले ठहरे थे। उसी होटल से विधायक मीटिंग में पहुंचे और उसके बाद फिर से वे वहीं लौट गए। सदन में अपने नंबरों को साबित करने से पहले वह किसी तरह का जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं हैं।

सूत्रों के मुताबिक, सीएम गहलोत सहित कांग्रेस के सीनियर नेता गुरुवार की देर रात तब विधायकों के साथ रहे। बताया जाता है कि गहलोत ने एक बार फिर उन विधायकों से बातचीत कर समझाने की कोशिश की, जो पायलट गुट की वापसी से नाराज थे। इसके अलावा, गहलोत लगातार पायलट गुट के बिना भी अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करते दिखे। उन्होंने मीटिंग में अपने भाषण में भी इसका जिक्र किया। वहीं जिस तरह से विधानसभा भवन में आयोजित विधायक दल की मीटिंग को ऐन मौके पर सीएम आवास पर आयोजित किया गया, वह भी कहीं न कहीं अपने आप में एक मैसेजिंग मानी जा रही है। यह उनके आत्मविश्वास को भी दिखाता है। दरअसल, गुरुवार की मीटिंग में हाथ मिलाने की औपचारिकता भले ही पूरी हुई हो, लेकिन सूत्रों के मुताबिक दोंनों नेताओं के भाव भंगिमा व बॉडी लेंग्वेज में वो गरमाहट नहीं दिख पा रही थी। इस बारे में प्रदेश के अहम सूत्र का कहना था कि हाथ मिले हैं, लेकिन मन मिलना और भरोसा कायम होना अभी बाकी है।

हाईकमान का विधायकों को दो टूक संदेश
सत्र को लेकर हाईकमान की ओर से सभी विधायकों को दोटूक संदेश दिया गया। विधायकों से कहा गया है कि वे सब एक साथ मिलकर पार्टी के हित में वोट करेंगे। सोनिया गांधी का यह संदेश मीटिंग के आखिर में वेणुगोपाल ने सुनाया। उनका कहना था कि पार्टी से ही हम सब हैं, पार्टी के बिना हम कुछ नहीं। वहीं पिछले एक महीने के चले आ रहे घटनाक्रम को उन्होंने एक बुरा सपना करार देते हुए सीएम व पायलट सहित सभी विधायकों को नसीहत दी किआज के बाद कोई भी इस मामले में ना तो पोस्टमार्टम करेगा और ना ही कोई मीडिया से इस बारे में बात करेगा। वेणुगोपाल का कहना था कि इसे लेकर पहले ही बहुत पोस्टमॉर्टम हो चुका है।

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