बाराबंकी का वो शख्स, जिसने पाकिस्तान का झंडा डिजाइन किया

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यूं तो पाकिस्तान (Pakistan) को आमतौर पर उन लोगों ने बनाया जो उस हिस्से में पैदा हुए, जहां आज भारत है. चाहे वो जिन्ना (Mohammad Ali Jinnah) हों या फिर लियाकत अली (Liaquat Ali Khan) या दूसरे बड़े नेता. लेकिन क्या आपको पूरी दुनिया में पाकिस्तान की पहचान बनने वाला उसका नेशनल फ्लैग (Pakistan National Flag) यानि राष्ट्रीय झंडा बाराबंकी के एक शख्स ने बनाया था.

पाकिस्तान हर साल 14 फरवरी को जब अपनी आजादी का दिन मनाता है तो इसी शख्स के डिजाइन किए झंडे को फहराता है. इस झंडे को उसने बहुत जल्दबाजी में डिजाइन करके बनाया था. इस शख्स का नाम था अमीरुद्दीन किदवई. वो बाराबंकी के जाने-माने किदवई परिवार से ताल्लुक रखते थे. बंटवारे में पाकिस्तान चले गए थे. पेशे से वकील थे.

पाकिस्तान की आजादी से महज तीन दिन पहले ही पाकिस्तान संविधान सभा ने इसे देश के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया था. मजे कि बात ये है कि अमीरुद्दीन ने पाकिस्तान के झंडे को डिजाइन तो जरूर किया लेकिन ना तो उनका डिजाइनिंग से कोई लेना-देना था और ना ही वो कोई आर्टिस्ट थे.

हालांकि लंबे समय तक ये माना जाता रहा कि पाकिस्तान का झंडा खुद मोहम्मद अली जिन्ना ने तैयार किया था. आज भी बहुत से लोग ऐसा ही मानते हैं.कौन था वो शख्स 
अमीरुद्दीन का जन्म बाराबंकी में 1901 में हुआ. शुरुआती पढ़ाई-लिखाई भी वहीं हुई. उसके बाद एलएलबी करने वो अलीगढ़ चला गया. वो वकालत करने के बाद मुस्लिम लीग का सक्रिय सदस्य बन गया. धीरे-धीरे जिन्ना और लियाकत अली के करीब आया.

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किदवई ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एलएलबी की थी. उसका सियासी करियर खिलाफत आंदोलन के दौरान शुरू हुआ. वो पहले इसकी कमेटी का सदस्य बना. फिर इसका मुख्य नेता. खिलाफत आंदोलन के मुख्य कर्ताधर्ता मौलाना शौकत अली उसे मेरा लेफ्टिनेंट कहते थे. इसके बाद वो खुदम ए काबा एसोसिएशन का संयुक्त प्रांत अध्यक्ष बनाया गया.

पाकिस्तान का वो झंडा जिसे अमीरुद्दीन किदवई ने करीब एक साल की मेहनत के बाद डिजाइन किया था

उन लोगों में जिन्होंने पाकिस्तान की योजना पर काम किया 
किदवई शुरू से ही देश की मुस्लिम राजनीति में सक्रिय था. 1936 में अमीरुद्दीन अखिल भारतीय मुस्लिम लीग में शामिल हो गया. 1938 में इसकी कौंसिल का सदस्य बना. वो उन लोगों में था, जो 40 के दशक में अलग पाकिस्तान की योजना बनाने लगे थे.

बंटवारे में पाकिस्तान चला गया
जब देश का बंटवारा होने लगा तो वो पाकिस्तान चला गया. लाहौर में जाकर बस गया. चूंकि उसने वकालत की पढ़ाई की थी, लिहाजा पंजाब यूनिवर्सिटी लॉ कालेज में फैकल्टी बन गया और सीनियर एडवोकेट के तौर पर प्रैक्टिस करने लगा. माना जाता है कि पाकिस्तान बनने से पहले ही उसने वहां का झंडा बनाने की तैयारी शुरू कर दी थी.

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11 अगस्त 1947 को इस झंडे को मिली थी मंजूरी 
उसकी इस योजना के बारे में जिन्ना को मालूम था. 11 अगस्त 1947 को जब पाकिस्तान संविधान सभा की मीटिंग में जिन्ना को राष्ट्रपति बनाने की घोषणा की तो वो अपना वो झंडा तैयार कर चुका था, जिसे वो पाकिस्तान के नेशनल फ्लैग के रूप में पेश करने वाला था. सभा में जब उसने गहरे हरे रंग की पृष्ठभूमि में चाद और सितारे के साथ इस झंडे को पेश किया तो ये एकझटके में सबको पसंद आया. इस झंडे की खड़ी सफेद पट्टी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को प्रदर्शित करती है.

करीब एक साल तक झंडे पर किया था काम 
बस तुरंत इस पर सहमति बन गई कि ये पाकिस्तान का झंडा बनेगा. इसे हल्के फुल्के संशोधन के साथ स्वीकार कर लिया गया. जब 14 अगस्त को मोहम्मद अली जिन्ना ने पहली बार पाकिस्तान का झंडा फहराया तो वो यही था. हालांकि पाकिस्तान दूतावास की वेबसाइट कहती है कि मुस्लिम लीग के झंडे का अध्ययन करते हुए अमीरुद्दीन ने लगातार झंडे के डिजाइन पर काम कर रहे थे. अमीरुद्दीन का बेटा सैयद अनवर किदवई बाद पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डेली जंग का सीनियर एडीटर बना.



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