प्रशांत भूषण विवाद: सुप्रीम कोर्ट इस बात पर कर रहा विचार कि सिटिंग जज के खिलाफ शिकायत कैसे किया जाए?

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धनंजय महापात्रा, नई दिल्ली
भले ही सुप्रीम कोर्ट अवमानना के मामले में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को कोर्ट से राहत नहीं मिली हो, लेकिन सोमवार को हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने गिरेबान को झांकने का फैसला किया है। कोर्ट ने कहा कि प्रशांत भूषण ने कोर्ट के सिटिंग जज को लेकर जो आरोप लगाए थे, वह एक जरूरी बात को सामने लाता है। कोर्ट के सिटिंग जज को लेकर अगर कोई शिकायत है तो उसका तरीका क्या होना चाहिए, यह एक महत्वपूर्ण सवाल है। प्रशांत भूषण ने 2009 में कहा था कि 16 पूर्व सीजेआई में आधे से ज्यादा करप्ट थे।

शिकायत की प्रक्रिया क्या होनी चाहिए?
सोमवार को इस मामले में सुनवाई हुई जिसमें तीन प्रमुख बातें सामने आई थीं। जस्टिस अरुण मिश्रा ने उनसे पूछा कि क्या आप प्रेस से बात करना चाहते हैं? इसके अलावा अगर आपको किसी जज से कोई शिकायत है तो इसकी प्रक्रिया क्या होनी चाहिए साथ ही किन परिस्थितियों में इस तरह के आरोप लगाए जा सकते हैं, ये भी एक सवाल है।

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24 अगस्त को अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई अब 24 अगस्त को होगी। 10 अगस्त को जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी ने कहा था कि प्रशांत भूषण ने करप्शन के जो आरोप लगाए हैं, वह कोर्ट की अवमानना है या नहीं उससे पहले कई बातों को समझना काफी जरूरी है।

1995 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र
सोमवार को सुनवाई के दौरान बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के जज सी रविचंद्रन अय्यर द्वारा 1995 में दिए गए एक फैसले का रेफरेंस दिया। उन्होंने कहा कि उस फैसले में जस्टिस अय्यर ने कहा था कि अगर बार मेंबर को किसी भी जज के खिलाफ अगर मटीरियल मिसकंडक्ट के सबूत हैं तो उन्हें इस संबंध में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस या सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से मुलाकात करनी चाहिए। उस फैसले में यह भी कहा गया था कि इसके बाद बार मेंबर को सीजेआई या हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को कार्रवाई करने के लिए उचित समय देना चाहिए।

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1992 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र
इसके अलावा 1992 में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच द्वारा दिए गए फैसले का भी जिक्र किया गया। उस बेंच को जस्टिस जेएस वर्मा हेड कर रहे थे। उस फैसले में मूल रूप से यह कहा गया था कि अगर किसी सिटिंग जज के खिलाफ गंभीर आरोप लग रहे हैं तो जांच को लेकर फैसला संसद की तरफ लिया जाएगा। जज को हटाने को लेकर सांसदों द्वारा जरूरी नंबर की सहमति जरूरी है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सिटिंग जज को भी अपनी बात कहने का पूरा अधिकार मिलता है।

वकील द्वारा शिकायत को लेकर फिलहाल कोई प्रक्रिया नहीं

प्रशांत भूषण का मामला इन दोनों मामलों से अलग है, क्योंकि दोनों मामलों में यह नहीं कहा गया है कि अगर कोई वकील जज के खिलाफ शिकायत करता है तो उसकी प्रक्रिया क्या होगी। इस मामले में प्रशांत भूषण की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन और कपिल सिब्बल कोर्ट में पेश हुए थे।

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