प्रशांत भूषण के ट्वीट को लेकर कंटेप्ट मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

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NBT

नई दिल्ली

प्रशांत भूषण के हाल के दो ट्वीट्स के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा कंटेप्ट मामले में लिए गए संज्ञान के बाद सुनवाई हुई और सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुआई वाली बेंच ने बुधवार को दिन भर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

प्रशांत भूषण ने हाल ही में दो ट्वीट किए थे जिस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को कंटेप्ट मामले में नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण ने अपने जवाब में कहा था कि चीफ जस्टिस की स्वस्थ आलोचना अवमानना नहीं है।

प्रशांत भूषण की ओर से सीनियर ऐडवोकेट दुष्यंत दवे पेश हुए और उन्होंने कहा कि प्रशांत ने जो ट्वीट किए उसमें न्याय प्रशासन की गरिमा पर कोई सवाल नहीं हैं। दवे ने एडीएम जबलपुर जजमेंट का हवाला दिया और कहा कि एक अंग्रेजी अखबार में इस जजमेंट के बाद जज की आलोचना की गई थी लेकिन फिर भी कोई अवमानना की कार्रवाई नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि भूषण का ट्वीट जूडिशरी को प्रोस्ताहित करने वाला है। अदालत ने कहा कि ऐसे केस में कोई पक्ष जीतता नहीं बल्कि गंवाते ही हैं।

दुष्यंत दवे ने कहा कि स्वस्थ आलोचना गलत नहीं है। न सिर्फ भारत बल्कि यूके के केस भी उनकी दलील को सपोर्ट करते हैं। उन्होने दलील दी कि ऐडमिनिस्ट्रेशन ऑफ जस्टिस एक ठोस नींव पर खड़ा है और वह भूषण के ट्वीट से प्रभावित नहीं हो सकता। कोई ये दावा नहीं कर सकता कि वह अमोघ है, यहां तक कि जज भी नहीं। दवे ने दलील दी कि भूषण ने सालों से तमाम मामलों में याचिका दायर की जिनमें फैसला हुआ इनमें कोलगेट केस और 2 जी केस शामिल हैं।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने 2009 के कंटेप्ट मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। प्रशांत भूषण के खिलाफ 2009 के कंटेप्ट से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर हमने स्पष्टीकरण व माफीनामा स्वीकार नहीं किया तो मामले की आगे सुनवाई की जाएगी। प्रशांत भूषण व तरुण तेजपाल के खिलाफ 2009 में कंटेप्ट की कार्रवाई में नोटिस जारी किया गया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई और अदालत ने वकीलों से फोन के जरिए दलील सुन थी।

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