प्रशांत भूषण के अदालत की अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट मेरिट पर करेगा आगे की सुनवाई

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नई दिल्ली

प्रशांत भूषण के खिलाफ 2009 के अदालत की अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट मेरिट पर आगे सुनवाई करेगा। प्रशांत भूषण ने मामले में जो स्पष्टीकरण दायर किया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्टीकरण को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि मामले में मेरिट पर सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रशांत भूषण और जर्नलिस्ट तरुण तेजपाल के खिलाफ वह अवमानना के मामले का परीक्षण करेगा और इस बात को एग्जामिन करेगा कि उनके द्वारा जजों के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी अदालत की अवमानना है या नहीं। इससे पहले 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि अगर हमने स्पष्टीकरण / माफीनामा स्वीकार नहीं किया तो मामले की आगे सुनवाई की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मामले की सुनवाई 17 अगस्त टली

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने मामले की सुनवाई 17 अगस्त के लिए टाल दी है। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2009 को इस मामले में प्रशांत भूषण और तरुण तेजपाल के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया था। इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने कुछ सीटिंग और कुछ पूर्व सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ आपत्तिनजक कॉमेंट किया था। ये इंटरव्यू मैग्जीन में छापा गया था। तेजपाल उस मैग्जीन के एडिटर थे।

साल 2009 में जारी हुआ था नोटिस

प्रशांत भूषण व तरुण तेजपाल के खिलाफ 2009 में अवमानना की कार्रवाई में नोटिस जारी किया गया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई हुई और अदालत ने वकीलों से फोन के जरिये दलील सुनी। सुप्रीम कोर्ट प्रशांत भूषण के ट्वीट मामले में शुरू किए गए अवमानना मामले की सुनवाई के बाद बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया था उस मामले में अभी फैसला आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2009 के अवमानना मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि क्या प्रशांत भूषण ने जो स्पष्टीकरण दिया है उसे स्वीकार किया जाए या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था कि अगर हम स्पष्टीकरण /माफीनामा को स्वीकार नहीं करते तो हम मामले में आगे सुनवाई करेंगे। प्रशांत भूषण ने हाल ही में दो ट्वीट किए थे, जिस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को नोटिस जारी किया था। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अलग से सुनवाई की है और उस मामले में भी फैसला सुरक्षित है।

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