पुलवामा जांच का अमेरिका कनेक्शन, एनआईए को मिली FBI से दो अहम जानकारी

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नई दिल्ली
पिछले साल फरवरी में पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले की जांच कर रही एनआईए को अमेरिका से कई तरह की सहायता मिली। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी एफबीआई ने एनआईए को ऐसे दो इनपुट की जांच में सहायता की जिससे असली गुनाहगारों तक पहुंचा जा सका। एफबीआई और एनआईए ने उस व्यक्ति की पहचान की जिससे हैंडलर संपर्क में थे। इसके अलावा धमाके में इस्तेमाल की गई विस्फोटक की प्रकृति की जांच में भी एफबीआई ने सहयोग किया।

एनआईए ने दी अहम जानकारी
हमारे सहयोगी प्रकाशन टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए एनआईए की प्रवक्ता सोनिया नारायण ने कहा कि हम विदेशी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के शुक्रगुजार हैं, जिन्होंे हमें कई अहम जानकारी उपलब्ध कराई। इसमें अमेरिका की एफबीआई ने भी सहायता की। इससे हमने अभियुक्तों को पकड़ने और घाटी में आतंकवाद फैलाने के पाकिस्तान के मंसूबों को ध्वस्त कर दिया।

आतंकी के व्हाट्सऐप की जांच में एफबीआई ने की मदद
एफबीआई ने जैश ए मोहम्मद के एक प्रवक्ता द्वारा चलाए जा रहे व्हाट्सऐप अकाउंट की जांच में भी मदद की। यह आतंकी हमले में शामिल अपने साथियों के साथ लगातार संपर्क में था। इस व्हाट्सऐप अकाउंट को कश्मीर के एक मोबाइल फोन पर मोहम्मद हुसैन ऑपरेट करता था। जांच करने पर उसकी लोकेशन पीओके के मुजफ्फराबाद में मिली। इस व्हाट्सऐप का नंबर बडगाम की रहने वाली एक महिला के नाम पर रजिस्टर्ड था, जिसकी 2011 में ही मौत हो चुकी थी।

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इसलिए एनआईए की ली गई मदद
एनआईए के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि, चूंकि भारत के बाहर से ऑपरेट होने वाले व्हाट्सऐप और फेसबुक अकाउंट्स की जानकारी को ट्रेस करना संभव नहीं है। इसलिए अमेरिकी एजेंसी एफबीआई की मदद ली गई।

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हमले के लिए इन विस्फोटकों का किया गया प्रयोग

एफबीआई ने एनआईए को यह पता लगाने में भी मदद की कि पुलवामा की घटना में किस विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था। शुरुआत में ही एफबीआई ने बता दिया थआ कि इसमें अमोनियम नाइट्रेट, नाइट्रोग्लिसरीन और जिलेटिन स्टिक का प्रयोग किया गया था। जिसकी पुष्टि बाद में केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला टीम ने भी की।

ऐसे भारत आया विस्फोटक
जांच में पता लगा कि आतंकियों ने हमले के एक साल पहले 2018 में ही 10-12 किलोग्राम के स्लैब में विस्फोटकों को इकठ्ठा कर लिया था। पहले वाले को मार्च में मुन्ना लाहौरी लेकर आया था, जबकि दूसरे को अप्रैल में उमर फारूख और तीसरे को मई में इस्माइल लांबू लेकर आया था। इस केस की जांच के दौरान एजेंसी को बहुत से सबूत मिले हैं।

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