पश्चिम बंगाल: ममता और गवर्नर में फिर उभरीं तल्खियां, टी-पार्टी से ममता गायब, धनखड़ बोले- जासूसी हो रही है

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हाइलाइट्स:

  • 15 अगस्‍त के मौके पर राज्‍यपाल धनखड़ और मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के बीच तल्‍खी उभरी
  • ममता बनर्जी शाम को राजभवन में दिए गए रस्‍मी जलपान में नहीं पहुंची, उनकी कुर्सी खाली रही
  • रविवार को राज्‍यपाल ने मीडिया के सामने आरोप लगाए कि राजभवन की निगरानी हो रही है

कोलकाता
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के बीच फिर तकरार बढ़ने लगी है। रविवार को राज्‍यपाल ने आरोप लगाया कि राजभवन की निगरानी की जा रही है। साथ ही उन्‍होंने यह भी जोड़ा कि राज्‍य में अराजकता का माहौल है। धनखड़ स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर राजभवन में आयोजित एक भोज में ममता बनर्जी की गैर मौजूदगी से भी नाराज दिखे।

राजभवन की निगरानी हो रही: धनखड़
पश्चिम बंगाल के गवर्नर जगदीप धनखड़ ने रविवार को आरोप लगाया कि राजभवन की निगरानी की जा रही है और इससे ‘संस्था की शुचिता कम हो रही है’। धनखड़ ने यह दावा विभिन्न मुद्दों को लेकर बीते एक वर्ष में राज्य की तृणमूल कांग्रेस की सरकार के साथ चल रही खींचतान के बीच किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में अराजकता का माहौल है। मीडिया से बातें करते हुए धनखड़ ने कहा, ‘मैं आप सभी को बताना चाहता हूं कि राजभवन निगरानी में है। इससे राजभवन की शुचिता कम होती है। मैं इसकी पवित्रता की रक्षा के लिए सब कुछ करूंगा।’

ममता नहीं आईं, खाली रही कुर्सी
15 अगस्‍त को राजभवन में आयोजित टी-पार्टी में ममता बनर्जी आमंत्रित थीं। लेकिन बाद में देखा गया कि राज्‍यपाल के दाईं ओर रखी कुर्सी खाली थी। इस पर एक लेबल लगा था जिस पर लिखा था ‘सीएम ममता बनर्जी’। बाद में गवर्नर ने इस मौके की फोटो के साथ ट्वीट किया, ‘स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्‍यमंत्री और उनके अधिकारियों की गैरमौजूदगी से मेरे साथ-साथ कई लोग हैरान रह गए।’ दूसरे ट्वीट में उन्‍होंने लिखा, ‘खाली कुर्सी बहुत कुछ बोलती है। इसने ऐसा अप्रिय माहौल बनाया जो पश्चिम बंगाल की समृद्ध संस्‍कृति और मूल्‍यों के साथ मेल नहीं खाता। ऐसा करने के पीछे कोई तर्क नहीं दिया जा सकता।’

dhankhad mamata

राजभवन में ममता बनर्जी की खाली कुर्सी

चुनाव के लिए बेहतर माहौल की अपील की
शनिवार को ही पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य की जनता से बेहतर माहौल बनाने की अपील की ताकि बिना किसी हिंसा के चुनाव हो सकें और राष्ट्र के लिए मिसाल कायम की जा सके। राज्य में 107 नगर निकायों के अलावा कोलकाता नगर निगम का चुनाव इस साल अप्रैल में होना था, जिन्हें महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया। अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव भी होना है।

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