चीनी जासूस चार्ली पेंग ने मजनूं का टीला में बनाया था सीक्रेट ऑपरेशन का कैंप

[ad_1]

हाइलाइट्स:

  • चार्ली पेंग के फर्जी नाम से दिल्ली के मजनूं का टीला में रहकर कर रहा था चीन के लिए जासूसी
  • चार्ली पेंग पर दिल्‍ली में रह रहे तिब्‍बतियों को घूस देकर दलाई लामा की जासूसी का भी आरोप
  • मजनूं का टीला में रहने वाले कई लामाओं और भिक्षुओं को स्‍टाफ के जरिए पहुंचाए गए पैकेट
  • शेल कंपनियों के खाते खुलवाकर 1000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा की हेराफेरी सामने आई

नई दिल्ली: 1000 करोड़ रुपये के हवाला रैकेट (China Money Laundering) के मामले में गिरफ्तार चीनी नागरिक लुओ सांग के मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। भारत में ‘चार्ली पेंग’ (Charlie Peng) के फर्जी नाम से रह रहा सांग दरअसल यहां चीन के लिए जासूसी कर रहा था। वह दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में निर्वासित तिब्बतियों से घुल-मिलकर और उनके ठौर-ठिकानों का पता लगा रहा था और इसकी जानकारी चीन की खुफिया एजेंसी ‘एमएसएस’ यानी मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी को भेज रहा था।

सांग अपने जासूसी के सीक्रेट ऑपरेशन का ट्रांजिट कैंप दिल्ली के मजनूं का टीला में बनाया हुआ था। वह कई लामाओं को रिश्वत देकर तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा और उनके सहयोगियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने में जुटा था। MSS इस काम के लिए सांग को हवाला से पैसे भेज रही थी।

चीन का हवाला रैकेटः दलाई लामा की जासूसी के लिए दी गई रिश्वत

CHARLIE_PENG_Passport

चार्ली पेंग के नाम से पासवोर्ट भी बनवाया हुआ था लुओ सांग ने

जांच सूत्रों के मुताबिक, मजनूं का टीला के पास पैकेटों में भरकर 2 से 3 लाख रुपये इस सीक्रेट ऑपरेशन से जुड़े लोगों को काम के ‌एवज में दिए गए थे। हवाला लेन-देन और जासूसी गतिविधियां वी-चैट ऐप के जरिए होती थीं। लेकिन, 29 जुलाई को 59 चीनी ऐप्स को भारत द्वारा बैन करने से सांग और उसके रैकेट में शामिल लोगों के बीच सीधा सीक्रेट संपर्क टूट गया था।

स्पेशल सेल ने 13 सितंबर 2018 को भी मजनूं का टीला इलाके से सांग को गिरफ्तार किया था। तब इसके ऊपर फर्जी पासपोर्ट के आधार पर दिल्ली में रहकर जासूसी का आरोप लगा था। लेकिन वह जमानत पर बाहर आ गया था।

[ad_2]

Source link

Tags:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *