गृह मंत्रालय से असम समझौता लागू करने के लिए मिले दो साल: हिमंत बिस्वा सरमा

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Assam Latest News: असम में नागरिकता समझौते को लेकर गृह मंत्रालय (MHA) की 14-सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति ने इस साल फरवरी से दो साल के भीतर इसकी सिफारिशों को लागू करने को कहा है। यह बात असम के मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कही।

Edited By Sujeet Upadhyay | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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हाइलाइट्स

  • असम के मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का दावा असम में नागरिकता समझौते को लागू करवाने को सरकार प्रतिबद्ध
  • गृह मंत्रालय की 14-सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति ने फरवरी से दो साल के भीतर इसकी सिफारिशों को लागू करने को कहा: सरमा
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय की समिति स्वयं “असमिया लोगों” की परिभाषा निर्धारित नहीं कर सकती है, सिफारिश को विधानसभा में मंजूरी जरूरी

गुवाहाटी

असम के मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि असम में नागरिकता समझौते को लेकर गृह मंत्रालय की 14-सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस साल फरवरी से दो साल के भीतर इसकी सिफारिशों को लागू किया जाना चाहिए। सरमा ने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से बनी समिति स्वयं “असमिया लोगों” की परिभाषा निर्धारित नहीं कर सकती है। जब तक इस सिफारिश को विधानसभा में मंजूरी नहीं मिलती।

असम के मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस दौरान मंगलवार को पैनल के चार सदस्यों की ओर से रिपोर्ट की सार्वजनिक करने की भी आलोचना की। यह रिपोर्ट ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के तीन वरिष्ठ नेताओं और अरुणाचल प्रदेश के एडवोकेट जनरल और प्रसिद्ध वकील निलय दत्ता ने मीडिया में लीक की थी। सरमा ने पत्रकारों से कहा कि समिति ने अपनी सिफारिशों के लागू करने के लिए दो साल दिए हैं। उन्होंने रिपोर्ट में इसे स्पष्ट रूप से लिखा है। ऐसे में रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से मामले में केवल जटिलताएं बढ़ी हैं।



असम समझौते को लागू करवाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध


सरमा ने कहा कि राज्य सरकार राज्य में नागरिकता को लेकर असम समझौते की धारा छह को लागू करवाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें कहा गया है, क्लॉज 6 के अनुसार, असमिया लोगों की संस्कृति, सामाजिक, भाषाई पहचान और विरासत की रक्षा, संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए संवैधानिक, विधायी और प्रशासनिक सुरक्षा उपाय, जो भी उपयुक्त हों किए जाएंगे।

विवाद की जड़ असमिया लोगों की परिभाषा

समझौते पर हस्ताक्षर होने बाद से विवाद की जड़ असमिया लोगों की परिभाषा है, जिसका समाधान समिति ने करने की कोशिश की। बीते 25 फरवरी को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी के शर्मा की अध्यक्षता में क्लॉज छह को लागू करने को लेकर उच्च स्तरीय समिति ने रिपोर्ट मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को सौंपी थी। पूर्वोत्तर के प्रमुख बीजेपी नेता सरमा ने कहा कि यह रिपोर्ट इस बात पर चुप है कि 1951 से पहले एक व्यक्ति असम में रहता था या नहीं, यह निर्धारित करने के लिए कि क्या 1951 में कटौती के साथ एक नया एनआरसी होगा- यह हम कैसे निर्धारित करेंगे।

सरमा ने उठाए ये सवाल

सरमा ने कहा कि अगर व्यक्ति 1951 से पहले असम में रहा हो तो समिति उस पर चुप है। क्या हम एक एनआरसी की जांच करेंगे जो यह निर्धारित करेगा या भूमि दस्तावेजों की जांच करेगा? कई स्वदेशी व्यक्तियों के पास 1951 से पहले के भूमि दस्तावेज नहीं हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि असमी लोगों को परिभाषित करने का अधिकार राज्य विधानसभा को है। विधानसभा के पास इस मामले में कुछ भी करने के लिए बहुत कुछ नहीं है जब तक कि विधानसभा परिभाषा की पुष्टि नहीं करती है। जब विधानसभा चर्चा के बाद परिभाषा की पुष्टि करती है तो केंद्र की भूमिका होगी।

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विधानसभा में लाने पर बोले सरमा

यह पूछे जाने पर कि विधानसभा से रिपोर्ट लेने की उम्मीद है, सरमा ने कहा कि हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या हमारे कार्यकाल के अंतिम समय पर हम असमी लोगों के लिए एक परिभाषा निर्धारित करने के लिए सक्षम हैं। यह बेहतर होगा यदि एक नई असम विधानसभा एक परिभाषा तय करे। हालांकि हमारे पास अभी छह महीने और हैं।

Web Title mha panel has given two years to implement clause 6 of assam accord: himanta biswa sarma(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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