गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला, जम्मू-कश्मीर से वापस बुलाई जाएंगी अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियां

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हाइलाइट्स:

  • जम्मू-कश्मीर से वापस बुलाई जाएंगी अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियां
  • करीब 12000 जवानों को हालात सामान्य होने के साथ ही बुलाया जाएगा वापस
  • अनुच्छेद 370 के अंत से पहले कश्मीर में तैनात कराए गए थे अतिरिक्त सुरक्षाबल
  • घाटी के हालातों की समीक्षा और उच्च स्तरीय बैठक के बाद किया गया फैसला

श्रीनगर
केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने कश्मीर घाटी में बीते एक साल तैनात पैरामिलिट्री की 100 कंपनियों को वापस बुलाने का फैसला किया है। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के अंत से पहले लगाई गई इन सभी कंपनियों को अब हालातों की समीक्षा के बाद वहां से हटाने का फैसला किया गया है। गृह मंत्रालय के इस फैसले को घाटी में विश्वास बहाली के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। करीब 12000 जवानों को वापस बुलाया जाएगा।

कश्मीर घाटी में अनुच्छेद 370 के अंत से पहले करीब 30 हजार अतिरिक्त सीआरपीएफ जवानों की तैनाती की गई थी। इसके अलावा बीएसएफ, सशस्त्र सीमा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों को भी यहां पर बड़ी संख्या में तैनात किया गया था। इन जवानों की तैनाती के साथ ही घाटी में हालातों की समय-समय पर समीक्षा की जा रही थी। हाल ही में अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर इन जवानों को सुरक्षा ड्यूटी में भी लगाने का फैसला हुआ था, लेकिन यात्रा के स्थगित होने के बाद इन्हें फिर से आंतरिक सुरक्षा के लिए लगा दिया गया था।

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उच्च स्तरीय बैठक के बाद हुआ निर्णय

अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षा एजेंसियों के अफसर, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और खुफिया विभाग के साथ एक हाई लेवल मीटिंग करने के बाद अतिरिक्त सुरक्षाबलों को घाटी से वापस लेने पर स्वीकृति दी। मंत्रालय के आदेश के बाद अब कुल 100 कंपनी अर्धसैनिक बलों को घाटी से वापस बुलाया जाएगा। इन सभी को अब फिर से अलग-अलग हिस्सों में तैनात कराया जा सकता है। माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में होने वाले बिहार के चुनावों के लिए भी पर्याप्त सुरक्षाबलों की व्यवस्था करने के लिए कुछ जवानों को यहां भेजा जा सकता है।

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बड़ा संदेश देने की कोशिश
दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर से सुरक्षाबलों की वापसी के फैसले को एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां जम्मू-कश्मीर में हाल ही में राजनीतिक नियुक्ति के रूप में मनोज सिन्हा को उपराज्यपाल बनाया गया है। वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार राज्य में हालातों के सामान्य होने के दावे करते हुए राजनीतिक गतिविधियों की बहाली कराने के प्रयास कर रही है। जानकारों का कहना है कि सुरक्षाबलों की वापसी का फैसला कर केंद्र ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि जम्मू-कश्मीर में अब किसी प्रकार का तनाव का माहौल नहीं है और स्थितियों के सामान्य होने के कारण वहां अतिरिक्त जवानों की जरूरत नहीं है।

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