क्या है उस चिट्ठी में जिस पर कांग्रेस की बैठक में छिड़ गई महाभारत

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हाइलाइट्स:

  • कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में चिट्ठी पर छिड़ा संग्राम
  • राहुल गांधी दिग्गज नेताओं की चिट्ठी से हैं नाराज
  • कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी ने पद छोड़ने की पेशकश की है
  • कमलनाथ और छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने सोनिया-राहुल के नेतृत्व पर जताया भरोसा

भोपाल
कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की वर्चुअल बैठक में पूर्व में सोनिया गांधी को लिखी गई चिट्ठी के मुद्दे पर घमासान मच गया। मनमोहन सिंह, एके एंटनी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं ने चिट्ठी लिखने वाले 23 नेताओं को खूब खरी-खोटी सुनाई। बात यहां तक आ गई दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस पार्टी छोड़ने तक की बात कह दी तो एक और सीनियर लीडर कपिल सिब्बल ने अपने ट्विटर हैंडल से अपनी कांग्रेसी पहचान मिटा दी। दरअसल, यह सब राहुल गांधी के उस बयान की प्रतिक्रिया में हुआ जिसमें उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी की चिट्ठी लिखने वालों पर बीजेपी के साथ सांठगांठ का आरोप लगा दिया। आखिर, सोनिया को किन नेताओं ने चिट्ठी लिखी, कब लिखी और चिट्ठी के जरिए उन सभी ने सोनिया को क्या कहा…

किन नेताओं ने लिखी चिट्ठी?

कांग्रेस के 23 वरिष्‍ठ नेताओं ने पार्टी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी जिनमें कांग्रेस कार्यसमिति के कई सदस्‍यों के अलावा पांच पूर्व मुख्‍यमंत्री, कई सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। सोनिया गांधी को भेजी गई चिट्ठी में राज्‍यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्रियों- आनंद शर्मा, कपिल सिब्‍बल, मनीष तिवारी, शशि थरूर, सांसद विवेक तनखा, AICC और CWC के मुकुल वासनिक और जितिन प्रसाद के नाम हैं। इसके अलावा पूर्व मुख्‍यमंत्रियों भूपिंदर सिंह हुड्डा, राजेंद्र कौर भटट्ल, एम वीरप्‍पा मोइली, पृथ्‍वीराज चव्‍हाण, पीजे कुरियन, अजय सिंह, रेणुका चौधरी और मिलिंद देवड़ा के भी पत्र पर हस्‍ताक्षर हैं। प्रदेश कमीटियां संभाल चुके राज बब्‍बर, अरविंदर सिंह लवली और कौल सिंह ने भी चिट्ठी को स‍मर्थन दिया है। इसके अलावा अखिलेश प्रसाद सिंह, कुलदीप शर्मा, योगानंद शास्‍त्री और संदीप दीक्षित के भी हस्‍ताक्षर हैं।

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सीडब्ल्यूसी की बैठक से 1 दिन पहले रविवार को पार्टी में उस वक्त नया सियासी तूफान आ गया, जब पूर्णकालिक एवं जमीनी स्तर पर सक्रिय अध्यक्ष बनाने और संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग को लेकर सोनिया गांधी को 23 वरिष्ठ नेताओं की ओर से पत्र लिखे जाने की जानकारी सामने आई।
हालांकि, इस पत्र की खबर सामने आने के साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ एवं युवा नेताओं ने सोनिया और राहुल गांधी के नेतृत्व में भरोसा जताया और इस बात पर जोर दिया कि गांधी परिवार ही पार्टी को एकजुट रख सकता है।

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कब लिखी थी चिट्ठी?
राहुल गांधी ने आज CWC की मीटिंग में इस चिट्ठी पर रोष प्रकट करते हुए कहा कि इसकी टाइमिंग ठीक नहीं थी। राहुल ने कहा कि जब सोनिया गांधी अस्पताल (SGRH) में भर्ती थीं तो कांग्रेस नेतृत्व के मुद्दे पर उन्हें चिट्ठी लिखना गलत है। ध्यान रहे कि सोनिया रुटीन चेक अप के लिए 30 जुलाई को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के लिए भर्ती हुई थीं। अस्पताल ने उनका नियमित परीक्षण और जांच के बाद 2 अगस्त को रिलीज कर दिया। एसजीआरएच मैनेजमेंट बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. डीएस राणा ने सोनिया गांधी को लेकर जारी हेल्थ बुलेटिन में कहा था, ’30 जुलाई 2020 की शाम सात बजे सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती हुईं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को आज दोपहर बाद एक बजे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। छुट्टी दिए जाने के वक्त उनकी हालत स्थिर थी।’ इससे स्पष्ट होता है कि चिट्ठी इसी दौरान लिखी गई थी।

चिट्ठी में क्या कहा गया?
कांग्रेस के 23 वरिष्‍ठ नेताओं ने चिट्ठी में साफ कहा गया है कि पार्टी अपना सपोर्ट बेस खो रही है और युवाओं का भरोसा भी। द इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नेतृत्‍व पर सवाल खड़े करते हुए इन नेताओं ने एक ‘पूर्णकालिक और प्रभावी नेतृत्‍व’ की मांग की है जो न सिर्फ काम करता नजर आए, बल्कि असल में जमीन पर उतरकर काम करे भी। इसके अलावा CWC का चुनाव कराने और पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए कोई योजना बनाने की भी मांग की गई है।

कांग्रेसियों ने गिनाईं दिक्‍कतें

– राज्‍य कांग्रेस अध्‍यक्षों, पदाधिकारियों की नियुक्ति में बेवजह देरी।
– सम्‍मान और स्‍वीकार्यता वाले नेता प्रदेश में नहीं भेजे जाते।
– राज्‍य प्रमुखों को संगठन के फैसलों की स्‍वतंत्रता नहीं।
– यूथ कांग्रेस और NSUI में चुनाव से संतुलन बिगड़ा।

‘नेहरू-गांधी परिवार कांग्रेस के लिए अहम’
नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र की सेहत के लिए पार्टी का मजबूत रहना जरूरी है। चिट्ठी में कहा गया कि कांग्रेस ऐसे समय में कमजोर पड़ी है जब देश ‘सबसे बुरे राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संकट’ से गुजर रहा है। नेताओं ने कहा कि लोकसभा चुनाव में हार के सालभर बाद भी पार्टी ने ‘आत्‍मनिरीक्षण’ नहीं किया है। नए नेतृत्‍व की मांग करते हुए 23 वरिष्‍ठ कांग्रेसियों ने कहा है कि ‘नेहरू-गांधी परिवार हमेशा पार्टी का अहम हिस्‍सा रहेगा।’
– नेतृत्‍व में स्‍थायी और प्रभावी बदलाव हो।
– CWC के चुनाव कराए जाएं।
– पार्टी की खोई ताकत हासिल करने के लिए मैकेनिज्‍म बने।
– संगठन के हर स्‍तर पर चुनाव हो।
– संसदीय पार्टी बोर्ड का गठन हो।
– राज्‍य इकाइयों को शक्तियां दी जाएं।

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