कोरोना ने बदले रिवाज, मोहर्रम में इस बार नहीं निकलेगी ताजिया, गाइडलाइन जारी

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कोरोना ने बदले रिवाज, मोहर्रम में इस बार नहीं निकलेगी ताजिया, गाइडलाइन जारी

लोगों से कोरोना गाइडलाइन का पालन करने की अपील की गई है. (File)

कोरोना संक्रमण (COVID-19) से एहतियात के तौर पर यूपी सरकार ने त्योहारों में किसी भी तरह की भीड़ जमा करने पर पाबंदी लगा दी है. यहीं वजह है कि मोहर्रम (Moharram 2020) और ताजिया में जुलूस नहीं निकाली जाएगी. 

लखनऊ. पूरे देश में कोरोना वायरस (COVID-19) का प्रकोप जारी है. हजारों की तादाद में रोज़ कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं. कोरोना का साया सभी तीज और त्योहारों पर भी पड़ रहा है. मुस्लिम समुदाय ने भी रमजान, ईद और बक़रीद के त्योहार को घरों में ही मनाया लेकिन शिया समाज का सबसे बड़ा मोहर्रम (Moharram 2020) का महीना भी कोरोना की भेंट चढ़ गया है. हालांकि मोहर्रम की तारीख अभी तय नहीं हो पाई है क्योंकि चांद देखने को बाद 10 दिनी मोहर्रम की शुरुआत होती है. ऐसे में इसके 21 या 22 अगस्त से शुरू होने के आसार हैं, जो 30 या 31 अगस्त तक चलेगा.

सरकार की तरफ से सख्त इशारों में किसी भी त्योहार में भीड़ जमा करने पर पाबंदी लगा दी गई है. यही वजह है कि इस बार मोहर्रम पर ताजिया और जुलूस  निकालने जाने पर रोक लगी है. देशभर में कोरोना वायरस गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है. कोरोना संक्रमण के चलते इस साल जुलूस निकालने पर सरकार की तरफ से पाबंदी लगा दी गई है. इसके साथ ही घरों से अशरे के दिन निकलने वाले ताजिये पर भी रोक रहेगी. पहली मोहर्रम से होने वाली शहर की बड़ी मजलिसें भी कोविड गाइडलाइस पर ही होगी कोई भीड़ इखट्टा नहीं हो सकेगी. इन्ही तमाम गाइडलाइन के जारी होने से पहले लखनऊ में इमाम ए जुमा मौलाना कल्बे जवाद ने दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी से मुलाकात की थी.

गाइडलाइन में संशोधन करने की गुजारिश

मौलाना यासूब अब्बास भी रक्षा मंत्री से मिलने दिल्ली गए थे. मौलाना यासूब अबब्बस ने कहा कि मोहर्रम हमारे लिए कोई पर्व नहीं है वो तो गम का मौका होता है. उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी गाइडलाइन में संशोधन करने चाहिए. भले ही बड़े जुलूस की इजाज़त न मिले लेकिन ताजिए उठाने की अनुमति मिलनी चाहिए. वहीं मौलाना की बात का जवाब देते हुए सरकार में मंत्री मोहसिन रज़ा ने कहा कि कोरोना को देखते हुए जो सरकार की तरफ से गाइडलाइन जारी की गई है. उसका सभी को पालन करना चाहिए. किसी धर्म विशेष को लेकर किसी को नहीं कहा गया है. जन्माष्टमी, गणपति, मोहर्रम सब पर पाबंदी है. धर्मगुरु लोगों से अपील करें कि साम्प्रदयिक सौहार्द बना रहें.धर्मगुरूओं से लोगों को

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आपको बता दें को चांद दिखने के बाद पहली मोहर्रम को लखनऊ के बड़े इमामबाड़े से शाही मोम की जरी का जुलूस निकाला जाता है. मोहर्रम के महीने में लखनऊ में अशूरा व चेहलुम का जुलूस समेत 7 बड़े जुलूस निकाले जाते हैं. इसमें हजारों की संख्या में अजादार शामिल होते हैं. इसके अलावा पहली मोहर्रम से नौ मोहर्रम तक शहर के बड़े इमामबाड़ों में मजलिसों का आयोजन किया जाता है. साथ ही दस मोहर्रम को अजादार अपने घरों में रखें हुए ताजियों को कर्बला ले जाकर दफन करते हैं.



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