उस अयोध्या की 10 खास बातें, जिसे देश के 07 सबसे प्राचीन और पवित्र नगरों में गिना जाता रहा है

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उस अयोध्या की 10 खास बातें, जिसे देश के 07 सबसे प्राचीन और पवित्र नगरों में गिना जाता रहा है

अयोध्या कई धर्मों की तीर्थस्थली रहा है. इसे देश के 07 सबसे प्राचीन और पवित्र शहरों मे्ं यूं ही नहीं गिना जाता

अयोध्या (Ayodhya) बहुत प्राचीन नगरी है. मान्यता है कि इसे मनु ने खुद भगवान विष्णु के निर्देशन में बसाया था. ये नगरी सीधे तौर पर राम की नगरी कही जाती है, जहां उनका जन्म हुआ. लेकिन कई धर्मों की तीर्थस्थली (Religious city) रहा है. इस शहर में कई संस्कृतियां और धार्मिकता मिली जुली है.

अयोध्या में 05 अगस्त में राम मंदिर के निर्माण का काम शुरू होने से पहले धूमधाम से भूमि पूजन किया जा रहा है. अयोध्या को ईसा से हजारों साल पुरानी नगरी कहा जाता है. ये माना जाता है कि इसकी स्थापना मनु ने की थी. हालांकि ये बात भी सही है कि ये देश के सबसे कम विकसित छोटे शहरों में है. लेकिन हिंदू धर्म से लेकर बौद्ध और जैन धर्म तक इस नगरी का खास धार्मिक महत्व रहा है.
अयोध्या को लेकर तमाम धर्मों के अपने दावे-दावे हैं. इन धर्मों में हिंदू, बौद्ध, जैन और मुस्लिम धर्म भी है. लेकिन पिछले कुछ दशकों से अयोध्या को प्राचीन हिंदू पौराणिक नगरी के रूप में अधिक माना जाता रहा है. अयोध्या को हिन्दू पौराणिक इतिहास में पवित्र सप्त पुरियों में अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची, अवंतिका (उज्जयिनी) और द्वारका में शामिल किया गया है.

अथर्ववेद में अयोध्या का अर्थ ईश्वर का नगर बताया गया है. इसकी संपन्नता की तुलना स्वर्ग से की गई है. स्कंदपुराण के अनुसार अयोध्या शब्द ‘अ’ कार ब्रह्मा, ‘य’ कार विष्णु है तथा ‘ध’ कार रुद्र का स्वरूप है. आइए जानते हैं अयोध्या नगरी की 10 खास बातें-

अयोध्या में कई महान योद्धा, ऋषि-मुनि और अवतारी पुरुष हो चुके हैं. भगवान राम ने भी यहीं जन्म लिया था. जैन मत के अनुसार यहां आदिनाथ सहित 5 तीर्थंकरों का जन्म हुआ था. अयोध्या की गणना भारत के सबसे प्राचीन सात नगरों यानि सप्तपुरियों में पहले स्थान पर की गई है.

जैन परंपरा के अनुसार भी 24 तीर्थंकरों में से 22 इक्ष्वाकु वंश के थे. इन 24 तीर्थंकरों में से भी सर्वप्रथम तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव जी) के साथ चार अन्य तीर्थंकरों का जन्मस्थान भी अयोध्या ही है. बौद्ध मान्यताओं के अनुसार बुद्ध देव ने अयोध्या अथवा साकेत में 16 वर्षों तक निवास किया था.यहां बड़े पैमाने पर सूफी संतों के रहने का भी प्रमाण मिलता है. ये समय 12वीं सदी के आसपास बताया गया है.

सरयू नदी के तट पर बसे इस नगर की रामायण अनुसार विवस्वान (सूर्य) के पुत्र वैवस्वत मनु महाराज द्वारा स्थापना की गई थी. वैवस्वत मनु लगभग 6673 ईसा पूर्व हुए थे. वैवस्वत मनु के 10 पुत्र- इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध थे. इसे इक्ष्वाकु कुल कहा गया. इसी कुल में आगे चलकर प्रभु श्रीराम हुए. अयोध्या पर महाभारत काल तक इसी वंश के लोगों का शासन रहा.

कहते हैं कि भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने फिर से राजधानी अयोध्या का पुनर्निर्माण कराया था. इसके बाद सूर्यवंश की अगली 44 पीढ़ियों तक इसका अस्तित्व बरकरार रहा. इस वंश का बृहद्रथ, अभिमन्यु के हाथों ‘महाभारत’ के युद्ध में मारा गया था. महाभारत के युद्ध के बाद अयोध्या उजड़-सी गई.

यह नगर मगध के मौर्यों से लेकर गुप्तों और कन्नौज के शासकों के अधीन रहा. अंत में यहां महमूद गजनी के भांजे सैयद सालार ने तुर्क शासन की स्थापना की. वो बहराइच में 1033 ई. में मारा गया था. उसके बाद तैमूर के पश्चात जब जौनपुर में शकों का राज्य स्थापित हुआ तो अयोध्या उनके अधीन हो गया. विशेषरूप से शक शासक महमूद शाह के शासन काल में 1440 ई. में. 1526 ई. में बाबर ने मुगल राज्य की स्थापना की. उसके सेनापति ने 1528 में यहां आक्रमण करके मस्जिद का निर्माण करवाया, जो 1992 में मंदिर-मस्जिद विवाद के चलते रामजन्मभूमि आन्दोलन के दौरान ढहा दी गई.

वाल्‍मीकि रामायण के 5वें सर्ग में अयोध्‍या पुरी का वर्णन विस्‍तार से किया गया है. बालकाण्ड में कहा गया है कि अयोध्या 12 योजन-लम्बी और 3 योजन चौड़ी थी. सातवीं सदी के चीनी यात्री ह्वेन सांग ने इसे ‘पिकोसिया’ संबोधित किया है. उसके अनुसार इसकी परिधि 16ली (एक चीनी ‘ली’ बराबर है 1/6 मील के) थी. आईन-ए-अकबरी के अनुसार इस नगर की लंबाई 148 कोस तथा चौड़ाई 32 कोस मानी गई है.

अयोध्या घाटों और मंदिरों की प्रसिद्ध नगरी है. सरयू नदी यहां से होकर बहती है. सरयू नदी के किनारे 14 प्रमुख घाट हैं. इनमें गुप्त द्वार घाट, कैकेयी घाट, कौशल्या घाट, पापमोचन घाट, लक्ष्मण घाट आदि विशेष उल्लेखनीय हैं.

यह स्थान रामदूत हनुमान के आराध्य प्रभु श्रीराम का जन्म स्थान है. राम एक ऐतिहासिक महापुरुष थे और इसके पर्याप्त प्रमाण हैं. शोधानुसार पता चलता है कि भगवान राम का जन्म 5114 ईस्वी पूर्व हुआ था. चैत्र मास की नवमी को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है. कहते हैं कि 1528 में बाबर के सेनापति मीरबकी ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर स्थित मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद बनवाई थी.

अकबर ने जब 1580 ई. में अपने साम्राज्य को 12 सूबों में विभक्त किया, तब उसने ‘अवध’का सूबा बनाया था और अयोध्या ही उसकी राजधानी थी. 1707 ई. में औरंगज़ेब की मृत्योपरांत जब मुग़ल साम्राज्य विघटित होने लगा, तब अनेक क्षेत्रीय स्वतंत्र राज्य उभरने लगे थे. उसी दौर में अवध के स्वतंत्र राज्य की स्थापना भी हुई.

मध्यकालीन भारत के प्रसिद्ध संत रामानंद जी का जन्म भले ही प्रयाग क्षेत्र में हुआ हो, रामानंदी संप्रदाय का मुख्य केंद्र अयोध्या ही हुआ.



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