इन राज्यों में MBBS ब्यूरोक्रेट्स संभाल रहे कोविड-19 से जंग का मोर्चा

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Corona updates: भारत की कोरोना से जंग में डॉक्टर्स और प्रशासन के साथ ऐसे अधिकारियों (Bureaucrats) का योगदान भी अहम हैं जो मेडिकल फील्ड से जुड़े रहे हैं। अपने अनुभवों का इस्तेमाल वे इस महामारी (COVID-19) से निपटने में बखूबी कर रहे हैं।

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

इन राज्यों में MBBS ब्यूरोक्रेट्स संभाल रहे कोविड-19 से जंग का मोर्चाकोरोना से जंग में भारत की दुनियाभर में तारीफ हो रही है। सरकार-प्रशासन से लेकर डॉक्टर्स तक इस लड़ाई में आम आदमी के साथ डटे हुए हैं लेकिन एक बात बहुत ही कम लोगों की पता है। इस जंग उन अधिकारियों का योगदान भी बेहद कारगार साबित हुआ है जो एमबीबीएस कर चुके हैं और अपने अनुभवों का इस्तेमाल करके कोरोना की रफ्तार को कम करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। टेस्टिंग सुविधा और अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ाने से लेकर, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग नियमों में सुधार तक ऐसे बहुत सी पहल के जरिए ये प्रफेशनल्स स्थिति को संभाले हुए हैं। आगे देखिए कौन हैं वे अधिकारी-

पंकज आशिया, महाराष्ट्र

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महाराष्ट्र में कोरोना से रिकवरी रेट सबसे बेहतर बताई जा रही है। यहां 2016 बैच के आईएएस अधिकारी पंकज आशिया कोरोना की कोविड मैनेजमेंट की कमान संभाले हए हैं। पावरलूम टाउन मालेगांव से ताल्लुक रखने वाले पंकज का महाराष्ट्र की रिकवरी रेट सुधार में महत्वपूर्ण योगदान है। स्क्रीनिंग बढ़ाने से लेकर घनी आबादी वाले इलाकों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग को उन्हीं की रणनीति थी। कम्युनिटी लीडर के साथ उन्होंने इसकी चर्चा की और इसे संभव बनाया। पंकज फिलहाल दूसरे हॉटस्पॉट भिवंडी-निजामपुर बेल्ट में तैनात हैं।

विपिन जैन, उत्तर प्रदेश

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यूपी प्रशासन में 7 डॉक्टर कोरोना से जंग में तैनात हैं। विपिन जैन बलिया में संयुक्त मैजिस्ट्रेट के रूप में तैनात हैं। विपिन जैन की स्वास्थ्य सुधारों में किए गए प्रयासों का ही नतीजा है कि बलिया में कोरोना से मृत्यु दर 1 फीसदी ही है। अप्रैल के मध्य में टेस्टिंग संख्या बढ़ाने से पहले ही बलिया में चार टेक्निशियन को अभ्यस्त कर दिया गया था और वे ऐंबुलेंस से घर-घर जाकर सैंपल कलेक्ट कर रहे थे। विपिन ने बताया, हमने रैंडम सैंपल से शुरुआत की लेकिन जल्द ही लक्षित सैंपल लेने शुरू कर दिए। इसमें न सिर्फ प्रवासी मजदूरों को शामिल किया बल्कि उनके भी सैंपल लेने शुरू किए जो ऊंचे मृत्यु दर वाले इलाके से आते हैं।

डॉ. दिव्या वी गोपीनाथ, केरल

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जब केरल में तिरुअनंतपुरम के तटीय गांव पोंथुरा को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया तो वहां के लोग प्रतिबंध स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। यहां के लोग सड़कों पर उतरकर विरोध करने लगे और सैंपल कलेक्ट करने वाली टीम को भी रोक दिया। आईपीएस अधिकारी डॉ. दिव्या वी गोपीनाथ को वहां तैनात किया गया और वह ग्रामीणों को समझाने के अपने प्रयास में सफल भी रहीं। डॉ. दिव्या ने उन ग्रामीणों से कहा, मैं पुलिस से ज्यादा एक डॉक्टर हूं। इसलिए कृपया मुझे सुने। अब वह तिरुवनंतपुरम के पूरे तटीय क्षेत्र में लॉ ऐंड ऑर्डर का नेतृत्व कर रही हैं।

नीलेश रामचंद्र देओरे, बिहार

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बिहार के जिलों में 5 ऐसे आईएएस ऑफिसर हैं जो पहले मेडिकल क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। इनमें से तीन डीएम के रूप में तैनात हैं। मधुबनी डीएम नीलेश रामचंद्र देओरे ने कहा कि मेडिकल एक्सपर्टाइज टीम ने उन्हें अडवांस में तैयार में काफी मदद की। इसके चलते समय रहते महामारी से निपटने के लिए इंतजाम किए गए। किशनगंज के डीएम आदित्य प्रकाश कहते हैं कि वह ट्रांमिशन साइकल समझने की क्षमता रखते हैं और अपनी टीम के साथ मिलकर हाई और लो रिस्क ग्रुप की पहचान करने में काम किया।

तमिलनाडु के MBBS ब्यूरोक्रेट्स

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तमिलनाडु में कम से कम 20 अधिकारी ऐसे हैं जिन्हें मेडिकल क्षेत्र का अनुभव हैं। उनमे से आधे ऐसे हैं जिन्हें महामारी मैनेजमेंट के लिए लगाया गया है। अपेक्स मॉनिटरिंग पैनल के सदस्य के गोपाल और बी चंद्रमोहन डाटा विश्लेषण करने के अलावा फीवर क्लीनिक और टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने के सुझाव देते हैं। बाकी अन्य फील्ड सपॉर्ट टीम और कंट्रोल टीम में तैनात हैं जिन्हें मेडिकल गियर और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग के लिए लगाया गया है।

डॉ. आकांक्षा भास्कर, पश्चिम बंगाल

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झारखंड से सटा पश्चिम बंगाल का पुरुलिया जिला ग्रीन जोन में था लेकिन प्रवासी मजदूरों का जत्था पश्चिम बंगाल में प्रवेश करने लगा तो यहां भी कोरोना के मरीज सामने लगे। कोरोना के फैलने से डर और सीमित संसाधनों को देखते हुए यहां की एडीएम आकांक्षा भास्कर ने अस्पतालों और हेल्थकेयर सेंटर का रूटीन दौरा शुरू किया। हर संभव तरीके से समस्या का निवारण किया। आकांक्षा पेशे से डॉक्टर रह चुकी हैं। उन्होंने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज से ग्रैजुएशन किया और उनका यह अनुभव कोविड से जंग में भी काम किया। आज की तारीख में पुरुलिया में कोरोना से एक भी मौत नहीं हुई।

डॉ. मनीष कुमार, गुजरात

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अहमदाबाद में मई के शुरुआती दिनों में मृत्युदर 7 फीसदी तक हो गई थी। तब 2013 बैच के आईएएस अधिकारी मनीष कुमार ने स्पेशल ड्यूटी अधिकारी के रूप में कमान संभाली। उन्हें प्राइवेट अस्पताल और सीसीयू का दौरा करने को कहा गया। एक अधिकारी कहते हैं, उनके योगदान से अहमदाबाद में मृत्युदर में भारी गिरावट आई। मनीष कुमार ने अस्पतालों में बेड की कमी का मुद्दा भी उठाया और दूसरे प्राइवेट अस्पतालों से गुजारिश करके बेडों की संख्या बढ़ाई।

डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी, झारखंड

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यहां पूरे राज्य में हेल्थकेयर सेक्टर का मैनेजमेंट देखने वाला शख्स खुद ही एक मेडिकल प्रफेशनल है। झारखंड के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी ने पूरे राज्य में छह टेस्टिंग लैब खोलने की प्राथमिकता पर काम किया।

डॉ. सुखचैन सिंह गिल, पंजाब

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अमृतसर पुलिस के प्रमुख डॉ. सुखचैन सिंह गिल एक डॉक्टर पैनल के सदस्य भी हैं जो स्थिति पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं। डॉ. गिल कहते हैं कि मेडिकल बैकग्राउंड से ताल्लुक रखने के कारण वह मामलों के ट्रेसिंग को समझने की बेहतर स्थिति में हैं।

मध्य प्रदेश के एमबीबीएस अधिकारी

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मध्य प्रदेश में 16 आईएएस अधिकारी ऐसे हैं जिनके पास मेडिकल डिग्री है। पंकज जैन और राहुल हरिदास विदिशा और सिवनी के कलेक्टर हैं। पंकज जैन दिल्ली एम्स में भी काम कर चुके हैं।

डॉ. केएस जवाहर रेड्डी, आंध्र प्रदेश

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यहां विशेष मुख्य सचिव डॉ. केएस जवाहर रेड्डी कोविड मैनेजमेंट का चेहरा हैं। वह अस्पताल केयर, ट्रेसिंग, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट की गाइडलाइन बनाते हैं। इनके अलावा सीएम के अडिशनल चीफ सेक्रेटरी डॉ. पीवी रमेश कंटेनमेंट प्लानिंग से जुड़े हुए हैं।

Web Title medical professionals turn bureaucrats who are giving their efforts to fight with pandemic(Hindi News from Navbharat Times , TIL Network)

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