इंपोर्ट बैन वाली लिस्ट के सामान भारत में नहीं बनी तो? सेना ने दिया यह जवाब

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रजत पंडित, नई दिल्ली
हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने 101 रक्षा उपकरणों के विदेशों से आयात पर बैन लगा दिया था। इस बैन को लेकर सशस्त्र बलों का कहना है कि वे बैन किए गए उपकरणों में से कुछ को खरीदने के लिए मजबूर होंगे, अगर घरेलू रक्षा उत्पादन उद्योग क्वॉलिटी स्टैंडर्ड में और तय समयसीमा में इन्हें उपलब्ध कराने में विफल रहता है।

आर्मी, नेवी और भारतीय वायुसेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने हमारे सहयोगी समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि रक्षा मंत्रालय सूची की ओर से जारी की गई सूची स्वदेशी डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस (DIB) को बढ़ावा देने के लिए एक ‘स्वागत योग्य कदम’ है, लेकिन सशस्त्र बलों के लिए यह ‘अनिश्चितताओं’ से भरा है।

‘स्वदेशीकरण के नाम पर नहीं कर सकते समझौता’एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हथियारों और गोला-बारूद के स्वदेशीकरण और प्रोडक्शन प्रॉसेस की सफलता के लिए प्रासंगिक होना होगा। ऑपरेशनल मिलिटरी रेडिनेस का स्वदेशीकरण के नाम पर समझौता नहीं किया जा सकता। रक्षा मंत्रालय ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत बड़ी घोषणा करते हुए बीते 9 अगस्त को देश में रक्षा उपकरणों का उत्पादन बढ़ाने के लिए 101 उपकरणों के आयात पर रोक लगा दी थी। इनमें बड़ी बंदूकों से लेकर मिसाइल तक शामिल हैं। इन उपकरणों के आयात पर दिसंबर 2020 से रोक लगेगी।

इंडियन डिफेंस इंडस्ट्री का निराशाजनक ट्रैक रेकॉर्ड
रक्षा मंत्रालय का यह कदम भारत को दुनिया के शीर्ष दो हथियार आयातकों में शामिल होने की रणनीतिक रूप से कमजोर स्थिति से बाहर निकालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘हां, विदेशी हथियारों की आपूर्ति आपात स्थिति में चोक सकती है। वे बहुत महंगे भी हैं। लेकिन, इंडियन डिफेंस इंडस्ट्री के पास निराशाजनक प्रदर्शन का एक लंबा ट्रैक रेकॉर्ड है।’

सेना के उप-प्रमुख जनरल लेफ्टिनेंट एसके सैनी ने कुछ दिन पहले कहा था कि उनकी फोर्स स्वदेशी वेपेन सिस्टम्स के साथ लड़ने के लिए तैयार है, लेकिन उन्हें क्वॉलिटी चेक पास करने होंगे और डिलीवरी की समय सीमा का पालन करना होगा। आपको बता दें कि उरी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ ’10 दिनों की लड़ाई’ के लिए रूस, इज़राइल और फ्रांस जैसे देशों के साथ लगभग 24,000 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट किए गए थे।

गोला-बारूद की गुणवत्ता को लेकर चिंतित है सेनासेना विशेष रूप से गोला-बारूद को लेकर चिंतित है। पिछले साल मई में टाइम्स ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट किया था कि सेना ने ओएफबी द्वारा टैंक, तोप, एयर डिफेंस और अन्य बंदूकों के लिए सप्लाई किए गए गोला-बारूद की खराब गुणवत्ता को लेकर रेड अलर्ट जारी करते हुए कहा था कि इसकी वजह से दुर्घटनाएं और कैजुअल्टीज में बढ़ोतरी हुई है। वहीं सरकार, अपनी ओर से ओएफबी के ‘कॉरपोरेटाइजेशन’ को लेकर मजबूती से आगे बढ़ रही है, ताकि सेना के लिए हथियारों, गोला-बारूद और कपड़ों के मुख्य आपूर्तिकर्ता के तौर पर इसकी फंक्शनल ऑटोनॉमी, सार्वजनिक जवाबदेही और दक्षता में सुधार हो सके।

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