आंध प्रदेश: 3 राजधानियों के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई की तैयारी में हैं किसान

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हाइलाइट्स:

  • आंध्र प्रदेश में 3 राजधानियां बनाने के फैसले का विरोद कर रहे हैं अमरावती किसान
  • अमरावती के लिए अपनी जमीन देने वाले किसानों ने हाई कोर्ट में दायर की है याचिका
  • हाई कोर्ट में कुल 53 याचिकाएं दायर हुई हैं, जिनमें 15 जनहित याचिकाएं भी शामिल हैं

अमरावती
आंध्र प्रदेश की वर्तमान सरकार राज्य की तीन राजधानियां बनाने के अपने फैसले पर अडिग है। राज्य के चहुंमुखी विकास के लिए जगन मोहन रेड्डी की सरकार सत्ता के विकेंद्रीकरण को जरूरी मान रही है। दूसरी तरफ उन किसानों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ विरोध जताया है, जिन्होंने अमरावती को राजधानी बनाने के लिए अपनी जमीनें दी हैं। सरकार के इस फैसले के खिलाफ आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में 53 याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें 15 जनहित याचिकाएं भी शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं में अधिकतर किसान हैं। वहीं, जनहित याचिकाएं अमरावती परिरक्षण समिति और अन्य किसान संगठनों की ओर से दायर की गई हैं। इन संगठनों ने नई याचिकाओं के साथ-साथ अंतरिम आवेदनों के जरिए भी हाई कोर्ट में सरकार के फैसले को चुनौती दी है। किसान संगठनों ने अमरावती में काम पूरा ना करने के लिए भी हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कई फैसलों को हाई कोर्ट में दी गई चुनौती
कई याचिकाकर्ताओं ने सरकार के उस फैसले के खिलाफ अपील की है, जिसमें राज्य सरकार ने एक्सपर्ट कमिटी की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। पांच से ज्यादा याचिकाएं एक्सपर्ट कमिटी रिपोर्ट पर आपत्तियां मंगवाने वाले नोटिस के खिलाफ ही दायर की गई हैं। इसके अलावा विजिलेंस कमिशन और इन्क्वॉयरी कमिश्नरेट को शिफ्ट करने और विजयवाड़ा गुंटूर और अन्य जगहों के भूमिहीन किसानों को अमरावती में घर देने के फैसले को भी चुनौती दी गई है।

किसानों को फौरी राहत भी मिली है क्योंकि हाई कोर्ट ने दफ्तरों को शिफ्ट करने के सरकारी आदेश को निरस्त कर दिया है। अमरावती मास्टर प्लान में बदलाव करके हाउसिंग लैंड अलॉटमेंट के लिए नया जोन बनाए जाने के फैसले को भी चुनौती दी गई है। सरकार हर हाल में तीन राजधानी के फैसले पर बरकरार है। किसान भी इसे रोकने के लिए हर कानूनी रास्ते को खंगाल रहे हैं। हाई कोर्ट ने इन सभी मामलों की एकसाथ सुनवाई का फैसला लिया है।

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