अयोध्या: 1000 साल तक बुलंद रहेगा राम मंदिर, दीवारों पर आप भी दर्ज करा सकते हैं नाम

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अयोध्या: 1000 साल तक बुलंद रहेगा राम मंदिर, दीवारों पर आप भी दर्ज करा सकते हैं नाम

अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर की ऊंचाई, लंबाई और चौड़ाई बढ़ाई गई है.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र निर्माण ट्रस्ट के अनुसार अयोध्या के राम मंदिर (Ram Mandir) के निर्माण में लोहे का इस्तेमाल नहीं होगा. राम भक्त इसके निर्माण में आर्थिक सहयोग देने के अलावा तांबे की पत्तियां भी दान दे सकते हैं.

अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या (Ayodhya) में लंबे इंतजार के बाद राम मंदिर (Ram Mandir) बनने जा रहा है. भूमि पूजन के बाद इसके निर्माण की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र निर्माण ट्रस्ट के चंपत राय के अनुसार राम मंदिर का निर्माण होने में 36 माह का समय लगेगा. मंदिर का निर्माण 1000 साल को ध्यान में रखकर किया जा रहा है. ऐसी कोशिश है कि समाज का हर वर्ग श्रीराम के दर्शन कर सके. उन्होंने बताया कि ट्रस्ट की तरफ से बैंक अकाउंट जारी किए गए हैं, इनमें लोग स्वेच्छा से दान दे सकते हैं. इसके अलावा तांबे की पत्तियां भी लोग भेज सकते हैं.

इस साइज की तांबे की पत्तियों को कर सकते हैं दान
बताया जा रहा है कि स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (न्यूयॉर्क) की तर्ज पर तांबे की परत बनाकर मंदिर का निर्माण होगा. मंदिर सालों साल तक ऐसे ही खड़ा रहे इसके लिए खास तरह से मंदिर निर्माण हो रहा है. ट्रस्ट के अनुसार मंदिर निर्माण में लगने वाले पत्थरों को जोड़ने के लिए तांबे की पत्तियों का उपयोग किया जाएगा. निर्माण के लिए 18 इंच लंबी, 3 मिलीमीटर गहरी और 30 मिलीमीटर चौड़ी 10,000 पत्तियों की आवश्यकता होगी. लोग इसे दान कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि इन तांबे की पत्तियों पर लोग इच्छानुसार अपने परिवार, क्षेत्र या मंदिरों का नाम गुदवा सकते हैं.

चंपत राय ने कहा कि मंदिर निर्माण में कोई जल्दबाजी नहीं करेंगे, सभी काम व्यवस्थित और पूरी तैयारी से होंगे. अभी मलबा हटाने में ही बहुत सामग्री मिली है जिन्हें संभालकर रखा जा रहा है. बाद में इनको संग्रहालय में रखा जाएगा. मंदिर के लिए राम जन्मभूमि में 60 मीटर गहराई के मिट्टी के सैंपल लिए गए हैं. यहां लगने वाले 1200 खंभों के ऊपर की बिल्डिंग की मोटाई के लिए रिसर्च जारी है.मंदिर में लोहे का नहीं होगा प्रयाेग
ट्रस्ट के सदस्यों ने बताया कि राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण के लिए सीबीआरआई रुड़की और IIT मद्रास के साथ मिलकर निर्माणकर्ता कंपनी एल एंड टी के इंजीनियरों ने भूमि की मृदा के परीक्षण का काम शुरू कर दिया है. जमीन की मिट्टी की जांच के बाद आगे का काम शुरू होगा. मंदिर का निर्माण भारत की प्राचीन निर्माण पद्धति से किया जा रहा है ताकि वह सहस्त्रों वर्षों तक न केवल खड़ा रहे बल्कि भूकंप, झंझावात या अन्य किसी प्रकार की आपदा में भी उसे किसी प्रकार की क्षति न हो. मंदिर के निर्माण में लोहे का प्रयोग नहीं किया जाएगा.



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